सरकार को फिर टेंसन, 10 जून को किसानों का भारत बंद

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इंदौर। देशभर में किसान संगठनों के गांव बंद आंदोलन के अंतिम दिन 10 जून को भारत बंद का आह्वान किया गया है। किसान संगठनों ने शहर के सभी व्यापारियों से भी अपील की है कि वे किसानों की समस्याओं के लिए एक दिन व्यापारी भी अपना कारोबार बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दें। किसान हर परिस्थिति में आपके लिए दूध, सब्जी और अनाज उपजाता है और आपके घर तक पहुंचाता है।

आंदोलन में शामिल राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने शनिवार को पत्रकारों से चर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा अगस्त में किसान आंदोलन का एक और चरण होगा। इसके तहत महासंघ 1 अगस्त से 90 दिन की अन्नदाता अधिकार यात्रा निकालेगा।

यह यात्रा अमरकंटक से शुरू होगी और भोपाल में इसका समापन होगा। यात्रा मध्यप्रदेश के 51 जिलों और 323 विकासखंडों से होकर गुजरेगी। यात्रा में चलित प्रदर्शनी भी होगी। यह प्रदर्शनी मध्यप्रदेश सरकार की 15 सालों की उपलब्धियों और कमियों दोनों पर केंद्रित रहेगी। पूरी यात्रा के दौरान अलग-अलग जगह दो-तीन आमसभाएं भी होंगी।

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यात्रा में कोई नेता या अभिनेता नहीं रहेगा। इसमें आदिवासी, गरीब, किसान और उनके बच्चे शामिल रहेंगे। शर्मा ने कहा प्रदेश में बीते 15 साल में 36 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। किसानों की समस्याओं और आत्महत्याओं पर देश के कृषि मंत्री राधामोहन सिंह सहित सत्ता में शामिल कई नेता उपहास करते हैं। कृषि मंत्री कहते हैं किसान प्रसिद्धि पाने के लिए आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों पर इस तरह की टिप्पणी सत्ता का अहंकार दर्शाती है।

किसान आंदोलन की सफलता-असफलता के सवाल पर उन्होंने कहा इस पर बात करने के बजाय हमें किसानों के मुद्दे पर बात करना चाहिए। सरकार को दबाव में लाना ही हमारी सफलता की पहली सीढ़ी है। ये प्रतिक्रियावादी या षड्यंत्रकारी नहीं बल्कि सही मायने में एक प्रगतिशील आंदोलन था। सब जानते हैं कि आंदोलन शुरू होने से अब तक सरकार की सांसें ऊपर-नीचे हुई हैं।

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कोर कमेटी लेगी कर्जमुक्ति की घोषणा पर समर्थन का फैसला 

मंदसौर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर 10 दिनों में किसानों की कर्जमुक्ति की घोषणा की है। इस घोषणा पर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ कांग्रेस को चुनाव में समर्थन करेगा?

इस सवाल पर शर्मा ने कहा इसका फैसला वे अकेले नहीं कर सकते। उनके साथ 172 किसान संगठन हैं। इस पर निर्णय हमारी कोर कमेटी करेगी। ऐसी घोषणा का कोई मतलब नहीं। सारी बातें किसानों के हित में लिखित में ली जाएंगी, वरना यह कहीं राजनीतिक दलों का छलावा न साबित हो। जहां तक राहुल गांधी का सवाल है तो भूमि अधिग्रहण बिल पर पहले भी उन्होंने हमारा साथ दिया था, बाकी दल पीछे हट गए थे।

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सीएम के सम्मेलन का होगा बहिष्कार

महासंघ ने कहा कि जबलपुर में 10 जून को मुख्यमंत्री किसान सम्मेलन कर रहे हैं। पिछले साल हुए किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर सहित मालवा में किसानों पर 7 हजार मामले दर्ज हुए हैं। जब तक ये मामले वापस नहीं लिए जाते, मुख्यमंत्री के इस सम्मेलन का किसान बहिष्कार करेंगे।

मेरी निष्ठा किसानों के प्रति, भाजपा या संघ में नहीं 

विधानसभा या अन्य चुनावों में टिकट मांगने के आरोप पर शर्मा ने साफ किया कि वे युवावस्था से ही किसान राजनीति में सक्रिय हैं। युवावस्था में पहले भी उन्हें कई दलों ने यह प्रलोभन दिया लेकिन तब चुनाव नहीं लड़ा तो अब बुढ़ापे में क्या किसी दल में शामिल होऊंगा। दलगत राजनीति में आने का मेरा न पहले कोई इरादा था, न अब है। मेरी निष्ठा केवल किसानों के प्रति है, भाजपा या संघ के प्रति नहीं।

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