टे‍क्‍नोलॉजी डेस्‍क। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सिक्योरिटी सिस्टम विकसित किया है, जो ब्रेन वेव्स यानी दिमाग में उठने वाली तरंगों का अध्ययन करके फोन को अनलॉक करता है। इसके लिए कई तस्वीरों को यूजर को दिखाया जाता है और उसके दिमाग में उठने वाली वेव्स को पढ़ने के बाद यह लॉक को खोलता है।

आने वाले दिनों में यह फीचर स्मार्टफोन में लगाया जाएगा, ताकि यूजर के डाटा और गोपनीय जानकारियों को उसके अलावा कोई और नहीं देख सके। यह प्रणाली आने वाले समय में उपकरणों को बेहतर तरीके से सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।

माना जा रहा है कि हैकर्स के लिए इस सिक्योरिटी सिस्टम को तोड़ पाना आसान नहीं होगा। फिलहाल कई स्मार्टफोन बाजार में मौजूद हैं, जिसमें चेहरे की पहचान, फिंगरप्रिंट स्कैन और अन्य बायोमैट्रिक सिक्योरिटी सिस्टम शामिल हैं।

मगर, इन टूल्स का इस्तेमाल करने के साथ यह समस्या भी है कि यदि एक बार इसे सेट कर दिया गया तो दोबारा रीसेट नहीं किया जा सकता है। अमेरिका में बफेलो (यूबी) यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर वेन्याओ जू ने कहा कि यदि आइरस या फिंगरप्रिंट स्कैनर का इस्तेमाल कर लेते हैं, तो इसे दोबारा नहीं बदला जा सकता है।

यही कारण है कि हम एक नए प्रकार का पासवर्ड विकसित कर रहे हैं, जो चित्रों की सीरीज दिखाता है और इसके आधार पर यूजर के मस्तिष्क से निकलने वाली तरंगों का विश्लेषण कर उस व्यक्ति की पहचान करता है।

उन्होंने कहा इस पासवर्ड सिक्योरिटी सिस्टम को रीसेट करना आसान है और इसका इस्तेमाल बायोमैट्रिक तरह भी किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए लोगों को हेडसेट पहनना पड़ सकता है। प्रोफेसर वेन्याओ ने कहा कि मस्तिष्क बॉयोमीट्रिक प्रणाली पर गहनता से किया गया पहला शोध अध्ययन है।