मेट्रो-बीआरटी कॉरीडोर के आसपास होंगी बहुमंजिला इमारतें

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भोपाल। प्रदेश के शहरों में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट नीति के तहत मेट्रो रेल और बीआरटी कॉरीडोर के दोनों ओर करीब आधा किमी क्षेत्र में अब बहुमंजिला इमारतों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र नाम दिया गया है। इस क्षेत्र में अब सरकार मिश्रित भू उपयोग को बढ़ावा देगी, जिसमें आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक, अर्द्ध सार्वजनिक और मनोरंजन क्षेत्र शामिल होंगे।

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट नीति लागू कर रही है। टीओडी क्षेत्र का विकास सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और पैदल चलने वाले लोगों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

खास तौर पर इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी व्यक्ति को मेट्रो या बीआरटी स्टेशन के लिए दस मिनट से ज्यादा पैदल न चलना पड़े। नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने इस नीति को मंजूरी दे दी है। अब इसे कैबिनेट में रखा जाएगा। नीति के तहत मेट्रो स्टेशन व बीआरटीएस कॉरीडोर के बस स्टॉप से जैसे-जैसे दूरी बढ़ेगी, इमारतों की ऊंचाई और घनत्व में कमी आती जाएगी।

निजी वाहनों का उपयोग सीमित करने बनेगी योजना

इस नीति के तहत शहरों में सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करने वाले और पैदल चलने वाले लोगों के लिए मेट्रो या बीआरटी कॉरीडोर के आसपास बेहतर व्यवस्थाएं की जाएंगी। ताकि लोग निजी वाहनों का उपयोग कम से कम करें।

नगर निगम की सहायता से मेट्रो कंपनी करेगी सीमांकन

टीओडी क्षेत्रों का सीमांकन मप्र मेट्रो रेल कंपनी लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) नगर निगम की सहायता से करेगी। मेट्रो रेल या बीआरटी कॉरीडोर के दोनों ओर आधा किमी यानी लगभग 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी के क्षेत्र को टीओडी क्षेत्र माना जाएगा।

नियम-कानून में करना होगा बदलाव

इस नीति को लागू करने के लिए राज्य सरकार को कई नियम और कानून में बदलाव करना पड़ेगा। नीति लागू करने के लिए मप्र नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम और इसके नियमों के साथ भूमि विकास नियम 2012 में संशोधन करना होगा।

इसके साथ ही नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय को टीओडी नीति के तहत नए सिरे से विकास योजना तैयार करनी होगी। विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड जैसी संस्थाओं के पास टीओडी क्षेत्र के ले-आउट प्लान, जोनल प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी होगी।

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