भोपाल। संविदाकर्मियों को रिक्त पदों पर नियमित करने के लिए अब तीन साल की समयसीमा का बंधन नहीं रहेगा। संविदा नियुक्ति के लिए चि-त पदों को चरणबद्ध तरीके से नियमित में परिवर्तित किया जाएगा।

इस नीति में संविदा अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए जो पद आरक्षित रहेंगे, उन पर नियुक्ति के बाद दोबारा आरक्षण लाभ लेने की पात्रता नहीं रहेगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने कैबिनेट से मंजूरी के बाद संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति की नीति व निर्देश जारी कर दिए हैं।

पांच साल संविदा पर रह चुके कर्मचारी ही होंगे नियमित

योजना में उन्हीं संविदा सेवकों को शामिल किया जाएगा तो कम से कम पांच साल तक नौकरी कर चुका है। बीच में यदि वो सेवा से बाहर हो गया और दोबारा काम करने लगा तो वो भी पात्र होगा। किसी भी विभाग की भर्ती में संविदाकर्मी हिस्सा ले सकेंगे। विभागीय अनुभव का कोई बंधन नहीं रहेगा। सीधी भर्ती के पदों पर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया से चयन होगा। नियुक्तिकर्ता विभाग न्यूनतम कट ऑफ अंक तय करेगा।

नियमित पद पर नियुक्ति 55 वर्ष से अधिक आयु वाले कर्मचारी को नहीं दी जाएगी। आरक्षण नियमों का पालन नियुक्ति प्रक्रिया में होगा। किसी भी संविदाकर्मी को बिना ठोस आधार या कारण सेवा से नहीं हटाया जाएगा।

जब तक संविदाकर्मी नियमित नहीं हो जाते उन्हें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि के आधार पर वार्षिक वेतनवृद्धि जनवरी में दी जाएगी। संविदा कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक बराबरी के नियमित पदों के वेतनमान के न्यूनतम का 90 फीसदी निर्धारित किया जाएगा।