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रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने शाह पहुंचे उद्धव के घर

मुंबई। संपर्क फॉर समर्थन अभियान के तहत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे से उनके निवास मातोश्री पर जाकर मुलाकात की। दोनों के बीच क्या बात हुई, इसका पता नहीं लग सका है, लेकिन यह तय है कि रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने पर काम इस दौरान जरूर किया गया होगा।

शिव सेना भाजपा की सहयोगी पार्टी रही है। अलबत्ता हाल के कुछ समय में दोनों के बीच तल्खी बढ़ी है। 28 मई को हुए पालघर उप चुनाव में दोनों ने अलग-अलग हाथ आजमाए थे। शिव सेना ने हार के बाद यहां तक कहा था कि भाजपा उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक दुश्मन है।

बुधवार को सामना में लिखे एक लेख के जरिये शिव सेना ने पूछा था कि मोदी सरकार बनने के चार साल बाद मीटिंग की जरूरत क्यों पड़ रही है। उप चुनाव में मिली हार तो इसकी वजह नहीं है। उद्धव ने ऐलान किया है कि सेना अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने यहां तक लिखा है कि पीएम सारा विश्व घूम रहे हैं तो शाह देश के भ्रमण पर हैं। उप चुनाव में मिली हार के बाद ही सारी कसरत क्यों की जा रही है?

रतन टाटा को बताई उपलब्धियां

अमित शाह ने दोपहर में रतन टाटा के दक्षिण मुंबई स्थित निवास पर जाकर उद्योगपति रतन टाटा से मुलाकात की व उन्हें सरकार की चार साल की उपलब्धियों से अवगत कराया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, भाजपा के राज्य प्रधान रावसाहेब दानवे उनके साथ मौजूद थे।

माधुरी व नेने से मुलाकात

अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से अमित शाह ने उनके निवास पर जाकर मुलाकात की। इस दौरान माधुरी के पति डॉ. श्रीराम नेने भी मौजूद रहे। शाह ने ट्वीट करके कहा कि मुलाकात बेहतरीन रही। हालांकि माधुरी दीक्षित के जुहू स्थित घर के बाहर मौजूद पत्रकारों के सवालों पर शाह ने कुछ नहीं कहा।

लता बीमार, नहीं हुई मुलाकात

अमित शाह को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से भी मुलाकात करनी थी, लेकिन उनके बीमार होने की वजह से बैठक नहीं हो सकी। लता ने ट्वीट करके कहा कि शाह से फोन पर बात हुई। उन्हें फूड प्वाइजनिंग हो गई है, लिहाजा वह उनसे नहीं मिल पाईं। लता ने शाह से कहा कि अगली बार जब भी वह आएंगे, दोनों जरूर मिलेंगे।

राजनीतिक सौदेबाजी हुईः कांग्रेस

अमित शाह व उद्धव ठाकरे की मुलाकात के बाद कांग्रेस ने कहा है कि दोनों के बीच राजनीतिक सौदेबाजी हुई है। महाराष्ट्र के प्रधान अशोक चव्हाण ने कहा कि शिव सेना की नाराजगी केवल इस बात को लेकर है कि वह कैसे भाजपा से ज्यादा राजनीतिक लाभ हासिल कर सके।

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