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मंदसौर से नाकामियों का प्रतिमान ढहाना मोदी-शिवराज के लिए नहीं है संभव

भोपाल। आखिर सच क्या है? मध्यप्रदेश की 20.02 प्रतिशत की शानदार कृषि विकास दर या खेतीबाड़ी में लगातार पांच साल तक सबसे अधिक गेहूं उत्पादन पर हासिल किया गया कृषि कर्मण अवार्ड या फिरभावांतर जैसी किसान हितैषी योजना जिसे केंद्र सरकार ने बेहतरीन मॉडल मानकर नवाजा हो या फिर किसान आंदोलन का राष्ट्रीय प्रतीक बन चुका मंदसौर जिला, जहां पिछले साल 6 जून को पुलिस फायरिंग में छह किसानों को मौत के घाट उतार दिया हो.

असफलता का जीवंत प्रतिमान
मध्यप्रदेश सरकार की वेबसाइट पर उपलब्धियों की शानदार तस्वीर पेश करने के बावजूद हकीकत यह है कि मंदसौर केंद्र और राज्य सरकारों की किसान हितैषी योजनाओं की असफलताओं का जीवंत प्रतिमान बन गया है. 6 जून को मंदसौर में मारे गए किसानों को श्रध्दांजलि देने जिस तरह से राजनीतिक दल और सवा सौ से ज्यादा छोटे बड़े जन संगठन पहुंच रहे हैं, वे बता रहे हैं कि असंतोष और तकलीफों की बंजर जमीन ने उन्हें किस कदर मजबूर कर दिया है.

हालातों को काबू करना मुश्किल 


केंद्र की मोदी सरकार के मंत्री और राज्य की शिवराज सरकार इसे कांग्रेस और विरोधी दलों की साजिश बता रही है, लेकिन सरकार की अंदरूनी तैयारी देखें तो पता चलता है कि मामला कितना गंभीर है. और सरकार हालातों को काबू में करने के लिए किस तरह पापड़ बेल रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तैयारी से मंदसौर पहुंच रहे हैं, उसे देखते हुए लग रहा है कि देश के 60 करोड़ किसानों को लक्ष्य करते हुए अपनी बात कहने वाले हैं.

राहुल करेंगे चुनावी ऐलान
क्या मंदसौर 2018 और 2019 की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित होगा ? कहना मुश्किल नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तैयारी से मंदसौर पहुंच रहे हैं, उसे देखते हुए लग रहा है कि देश के 60 करोड़ किसानों को लक्ष्य करते हुए अपनी बात कहने वाले हैं. यह एक तरह से उनके चुनाव अभियान की शुरूआत होगी. जिसमें वे संभवत किसान समृद्धि संकल्प योजना का ऐलान करेंगे. वे वादा करेंगे कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो किसान को एक निश्चित आय प्रतिमाह दी जाएगी.

खुफिया तंत्र ने ताकत झोंकी
एक जून से शुरू हुआ दस दिन का किसान आंदोलन किस करवट बैठेगा इसे लेकर शिवराज सरकार पूरी तरह आशंकित और चौकन्नी है. पुलिस का खुफिया तंत्र आंदोलन की थाह पकड़ने में भिड़ा हुआ है. इंटेलीजेंस चीफ मकरंद देउस्कर के निर्देशन में 15 हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी ऑपरेशन 240 घंटे को पूरा करने में लगे हैं. 18 जिलों को अति संवेदनशील की श्रेणी में रखा गया है. तो मंदसौर और अन्य जिलों में धारा 144 लगा दी गई है. किसानों से शांति भंग न हो इसके बांड भरवाए जा रहे हैं.

आंदोलन शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर में किसान और मजदूर सम्मेलन बुलाया. जिसमें खुलकर आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रदेश में खून-खराबा करना चाहती है

किसान सम्मेलन बना राजनीतिक सम्मेलन
आंदोलन शुरू होने से पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंदसौर में किसान और मजदूर सम्मेलन बुलाया. जिसमें खुलकर आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रदेश में खून-खराबा करना चाहती है. किसान भाई उनके बहकावे में न आए. उन्होंने याद भी दिलाया कि किस तरह 20 हजार करोड़ रू वे किसानों के हित में खर्च कर चुके हैं. और आगे भी शिवना नदी शुद्धिकरण के साथ करोड़ों रू. की सिंचाई योजनाओं को अंजाम देने वाले हैं.

मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव सक्रिय
लेकिन मामला अब आगे निकल चुका है. मेधा पाटकर के नेतृत्व में बड़वानी से निकली सैकड़ों किसानों की यात्रा भोपाल में पहुंच कर सांकेतिक धरना कर अपनी ताकत दिखा रही हैं. स्वराज अभियान के योगेद्र यादव ऑल इंडिया किसान संघर्ष को ऑर्डिनेशन कमेटी के 190 से ज्यादा संगठन किसी भी राजनीतिक मंच को साझा नहीं करते हुए अपना विरोध मंदसौर के बुधा गांव में रैली आयोजित कर करने वाले हैं.

मेधा पाटकर के नेतृत्व में बड़वानी से निकली सैकड़ों किसानों की यात्रा भोपाल में पहुंच कर सांकेतिक धरना कर अपनी ताकत दिखा रही हैं

दोषी कौन आज तक नहीं पता
आल इंडिया किसान सभा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से अलग हुआ राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के शिवकुमार कक्काजी पिछले साल की तरह इस बार भी पूरे प्रदेश में किसान आंदोलन को ताकत देने में लगे हैं. कक्काजी कहते हैं कि शिवराज सरकार किस हद तक किसान हितैषी है, इस बात का पता इससे लगाया जा सकता है कि आज तक छह किसानों की मौत का जिम्मेदार कौन है? यह तय नहीं हो पाया है. सरकार ने जितनी तत्परता और घबराहट एक-एक करोड़ का मुआवजा बांटने में लगाई उसका एक चौथाई हिस्सा भी दोषियों को सजा देने में लगाती तो कहानी कुछ और होती.

योगेंद्र यादव कहते हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है. किसानों के अधिकार को लेकर बिल संसद में पेंडिंग हैं. इस पर एक विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है.

किसानों के लिए विशेष सत्र बुलाएं
योगेंद्र यादव कहते हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है. किसानों के अधिकार को लेकर बिल संसद में पेंडिंग हैं. इस पर एक विशेष सत्र बुलाने की जरूरत है. किसानों को लाभकारी मूल्य मिले और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य इसमें खास है.

बुरे हाल में खेतिहर मजदूर
नर्मदा बांध के विस्थापित किसानों की जन अदालत लेकर भोपाल पहुंची मेधा पाटकर ने कहा कि आदिवासी, किसान और खेतीहर मजदूर और फिशरमेन बुरे हाल में हैं. गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इन से काम छीन लिया गया है. अवैध खनन, बांध के निर्माण और विस्थापन ने हालात खराब कर दिए हैं. 8 जून को मोदी विरोधी और भाजपा के पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा भी मंदसौर पहुंच रहे हैं.

सरकार की भारी सख्ती
शिवराज सरकार की पूरी राजनीतिक और प्रशासनिक ताकत का नतीजा यह है कि इस बार आंदोलन शांतिपूर्ण चल रहा है. सोशल मीडिया पर पूरी नजर है. एक छोटी से उपद्रव को भी तेजी से कुचला जा रहा है. मंदसौर से सरकारों की नाकामियों का प्रतिमान ढहाना अब शिवराज या मोदी सरकार के लिए संभव नहीं है.