13 भारतीय तटों को मिलेगा प्रतिष्ठित ब्लू फ्लैग प्रमाण पत्र

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नई दिल्ली। पर्यावरण के अनुकूल, स्वच्छ और विश्व स्तरीय जनसुविधाओं से सुसज्जित 13 भारतीय समुद्र तटों को जल्द ही ब्लू फ्लैग प्रमाण पत्र मिलेगा। ये तट ओडिशा, महाराष्ट्र और अन्य तटवर्ती राज्यों के हैं।

इन तटों को मिलने वाला ब्लू फ्लैग प्रमाणन न केवल भारत में बल्कि पूरे एशिया में पहली बार होगा। ओडिशा स्थित कोणार्क कोस्ट को पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर पहला प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

भारत के समुद्री तटों को विकसित करने की जिम्मेदारी पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली संस्था सोसायटी फॉर इंटीग्रेटेड कोस्टल मैनेजमेंट (एसआइसीओएम) संभालती है। यह संस्था ब्लू फ्लैग प्रमाणन के मानदंडों के अनुसार कार्य करती है। संस्था के परियोजना निदेशक अरविंद नौटियाल के मुताबिक ब्लू फ्लैग प्रमाणन के लिए समुद्री तट को प्लास्टिक मुक्त और कचरा प्रबंधन युक्त बनाना होता है।

वहां पर पर्यटकों के लिए स्वच्छ पानी और अन्य सुविधाएं मुहैया करानी होती हैं। इस सबके साथ तट के पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखना होता है। नौटियाल ने बताया कि ब्लू फ्लैग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए तट को 33 पर्यावरण और पर्यटन संबंधी मानदंडों पर खरा उतरना होता है। इसी वजह से अभी तक पूरे एशिया में एक भी ब्लू फ्लैग समुद्री तट नहीं है।

ब्लू फ्लैग बीच स्टैंडर्ड की स्थापना सन 1985 में कोपेनहेगन की संस्था फाउंडेशन फॉर इन्वॉयरमेंटल एजूकेशन ने की थी। इस प्रमाणन को पूरी दुुनिया की मान्यता प्राप्त है। आने वाले दो वर्षों में पूरे यूरोप के सभी समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग प्रमाण पत्र मिलने की संभावना है, जो किसी महाद्वीप में सर्वाधिक होंगे। भारत में ब्लू फ्लैग प्रमाणन के मानदंडों के अनुकूल समुद्री तट तैयार करने की मुहिम दिसंबर 2017 में शुरू हुई थी जो एक साल से भी कम समय में अपने लक्ष्य के करीब पहुंच गई है।

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