जबलपुर व कटनी रेल्‍वे स्‍टेशन में एक साथ बजे हूटर, मची रही अफरा-तफरी, फ‍िर क्‍या हुआ जानें..

जबलपुर, नगर संवाददाता। हरी बत्ती होते ही हार्न बजा और गार्ड की हरी झंडी के बाद बीती रात गाड़ी संख्या 2018 जबलपुर-कटनी एक्सप्रेस निर्धारित समय पर जबलपुर के मुख्य रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छःसे रवाना हुई। कुछ यात्री कोच में बैठ कर चर्चा में मशगूल थे तो कुछ सोने की तैयारी में थे। ट्रेन 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से कटनी की ओर दौड़ रही थी ।

ट्रेन में सवार यात्रियों को क्या मालूम था कि आगे उनकी जान पर बन आएगी। । घड़ी की सुईयां रात 2 बजकर 50 मिनिट पर भी तभी गोसलपुर रेलवे स्टेशन में तेज धमाके के साथ ट्रेन के तीन डिब्बे पटरी से उतरकर एक दूसरे के उपर चढ़ गये। इस हादसे में पांच यात्रियों की मौत हो गई वहीं एक की हालत नाजुक होने के कारण उसे उपचार के लिये रेलवे अस्पताल भेजा गया ।

21 यात्रियों को मामूली चोटें आनें के कारण उनका मौके पर उपचार किया गया। इस दुर्घटना की जानकारी रेल अधिकारियों को लगते ही उन्होंंंने ं बचाव कार्य के लिये तत्काल छः एम्बूलेंस रवाना कीं मंडल का पूराअमला मौके पर पहुंच गया और एनडीआरएफ की मदद से कोच में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।रेलवे ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख एवं घायलों को 50-50 हजार की सहायता राशि देने की बात कहीं गई।

रात 2 बजकर 55 मिनिट पर हुई ट्रेन दुर्घटना की खबर लगते ही आस पास के ग्रामीण मदद के लिए दौड़ पड़े । इधर जबलपुर से डीआरएम डॅा.मनोज सिंह दलबल सहित मौके पर पहुंचे गये थे। आरपीएफ,जीआरपी सहित आस पास के थानों का पुलिस बल भी बचाव कार्य में जुट गया। उधर बनारस से एनडीआरएफ टीम को इसकी जानकारी मिलते ही वह भी अपने 35 सदस्सीय जत्थे को लेकर मौके पर पहुंची जहां पर कोच को ग्रिलों से काट कर मृत यात्रियों को बाहर निकाला गया।

चौंकिये  नहीं दरअसल जबलपुर मंडल व एनडीआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा इस तरह की किसी भी संभावित रेल दुर्घटना होने पर से कैसे बचाव कार्य किया जाये इसकी मॉक ड्रिल की । जिसमें जीवंत चित्रण कर इस तरह की दुर्घटनाओं से निपटने के लिये सजगता -सतर्कता को लेकर जबलपुर मंडल में पहला अभ्यास किया गया। जबकि इसके पूर्व इस तरह का अभ्यास पूर्व में भोपाल एवं शहडोल में किया जा चुका है।
इस तरह से की गई थी तैयारी

पांच बार बजा था हूटर
देर रात गोसलपुर में इस तरह के आपदा प्रबंधन को लेकर रेलवे के अधिकारियों द्वारा पहले से तैयारी की जा चुकी थी जिसमें जबलपुर व कटनी एनकेजे में एक साथ पांच बार हूटर बजाया गया था। हूटर बजते ही रेलवे प्रशासन द्वारा दुर्घटना राहत ट्रेन,मेडिकल रिलीफ वैन,चिकित्सकों की टीम एवं इस तरह की दुर्घटना में जिसकी सबसे अहम भूमिका रहती है उस मैकेनिकल विभाग को भी पूर्व से सजग कर दिया गया था।

दो माह से चल रही थी इसकी तैयारीःडीआरएम

इस मॉक ड्र्रिल के संबंध में डीआरएम डॉ.मनोज सिंह ने बताया कि इसकी तैयारी विगत दो माह से चल रही थीं। इसमें एनडीआरएफ का सहयोग काफी महत्वपूर्ण रहा है।उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी भी बड़ी दुर्घटना से निपटने के लिये जबलपुर में इस तरह का यह पहला मौका है। उन्होंंने बताया कि हूटर बजने के 15 मिनिट में दुर्घटना स्थल पर पहुंचना पड़ता है। इसकी पूरी फिल्म भी तैयार कराई गई है।यहां से वापिस जाने के बाद इसकी पूरी एक रिपोर्ट तैयार कर रेलवे वोर्ड को भेजी जायेगी। इस मौके पर एडीआरएम दिनेश चन्द्र, अंजू मोहनपुरिया, वरिष्ठ संरक्षा अधिकारी संजय कुमार, सीनियर डीसीएम आंनद कुमार,ब्रांच अधिकारी मणिभूषण सिंह ,एनडीआरएफ के टीम कमांडर सुखदेव झारिया टीम के साथ मौजूद रहे।

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