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कांग्रेस आज देशभर में मनाएगी ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’

बेंगलुरु। कर्नाटक का हाईवोल्टेज ड्रामा अभी भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार को येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी इस पर बवाल जारी है. जहां बीजेपी इस बात को लेकर आश्वस्त होती दिख रही है कि गेंद उनके पाले में है. वहीं इससे बौखलाई कांग्रेस पार्टी बीजेपी पर हमला बोलने के लिए लगातार नए तरीके ढूंढ रही है. कर्नाटक की तर्ज पर गोवा, मेघालय और मणिपुर में सरकार बनाने का दांव फेंकने के बाद अब कांग्रेस ने कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

कांग्रेस ने राज्यपाल के बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने को संविधान की हत्या बताया है और इसके विरोध में 18 मई को पूरे देश में ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ मनाने का ऐलान किया है.

वहीं, कर्नाटक के गवर्नर वजुभाई वाला ने चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. कांग्रेस ने गवर्नर के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है. शुक्रवार सुबह 10:30 बजे सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई होनी है.
देशभर में होगा धरना-प्रदर्शन
कांग्रेस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. ट्वीट में कहा गया है कि शुक्रवार को पार्टी ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ मनाएगी. सभी जिला मुख्यालयों और राज्य मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा. जनता को बताया जाएगा कि कर्नाटक में किस तरह से सत्ता के लालच में ‘लोकतंत्र की हत्या’ की गई है.’
पार्टी ने ट्वीट में एक नोटिस भी अटैच किया है जिसमें सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को राज्य स्तरीय धरना करने को कहा गया है.

क्या है कर्नाटक का फॉर्मूला?
कर्नाटक में बीते शनिवार को चुनाव हुए. चुनाव के नतीजे में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. 224 सदस्यीय विधानसभा में 222 सीटों पर चुनाव हुए इसमें बीजेपी को 104 सीटें मिलीं, वहीं कांग्रेस को 78 सीटें ही मिल पाईं. जेडीएस 37 सीटों पर सिमट गई. नतीजे आने के बाद नाटकीय घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर लिया. कांग्रेस-जेडीएस नेताओं ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा भी किया. लेकिन, ऐन वक्त पर बीजेपी ने बाजी मार ली. राज्यपाल ने सिंगल लारजेस्ट पार्टी के आधार पर बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दे दिया. पूरे मामले को लेकर बुधवार देर रात कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट भी गई. पूरी रात मामले की सुनवाई के बाद तीन जजों की बेंच ने येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

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