वन्य जीवों और वन संपदा की तस्करी बढ़ी, नेपाल व भूटान तस्करों की पनाहगाह

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तमाम कोशिशों के बाद भी वन्य जीवों को मार कर उनके अंगों की तस्करी का धंधा बेरोक टोक जारी है। तस्करों के सरगना पकड़ में नहीं आने के कारण जांच एजंसियों असहाय हैं। पिछले तीन साल में नेपाल और भूटान से लगे भारत के सीमावर्ती सघन वन क्षेत्रों में वन्य जीवों का अवैध शिकार कर उनके अंगों तथा अन्य वन संपदा की तस्करी के मामलों में सौ फीसद से ज्यादा का इजाफा हुआ है। विभिन्न जांच एजंसियों की ओर से इस अवधि में तस्करों से मिली वन संपदा की कीमत 2.21 करोड़ रुपए से बढ़कर 187.69 करोड़ रुपए हो चुकी है। इसकी पुष्टि उस आंकड़े से भी हो रही है जो सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की ओर से नेपाल और भूटान के सीमाई इलाकों में इस तस्करी को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियान की तीन वर्षीय रिपोर्ट में दर्ज हैं।

एसएसबी की रिपोर्ट से साफ है कि जहां 2014 में वन संपदा की तस्करी के बमुश्किल 39 प्रकरण दर्ज हुए थे, वे बढ़कर 82 हो गए हैं। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पिछले दिनों वन संपदा की तस्करी रोकने में सशस्त्र बलों की भूमिका विषय पर हुए सेमिनार में इस इजाफे पर चिंता भी जताई थी। यह स्थिति तब है जबकि केंद्र सरकार ने 2014-2016 के दौरान बाघों के संरक्षण के लिए 15 हजार करोड़ की रकम खर्च की। देश में बाघों के अवैध शिकार की दशा यह है कि महाराष्ट्र के मेलघाट टाइगर रिजर्व में एक वर्ष में 19 बाघों के मारे जाने का अंदेशा है।

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