शाह के भाषण, शिवराज की बॉडी लैंग्वेज और विजयवर्गीय नोरोत्तम के मंचासीन तक “कुछ तो गड़बड़” है?

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राजनीतिक डेस्क। भाजपा की प्रदेश विस्तारित बैठक में कुछ खास बातें भी सामने आईं जैसे भाजपा की 2018 में सरकार बनाने के लिए सभी वक्ताओं ने अमित शाह के पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में होने की कभी साफ साफ तो कभी इशारों इशारों में बात कही केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शिवराज के तारीफों के पुल बांधे तो प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह भी शिवराज के नेतृत्व की प्रशंसा करते रहे।

इन दोनों के उद्बोधन का निचोड़ यह निकल कर आया कि भाजपा इस बार भी शिवराज को ही चेहरा बनाएगी। सबकी नजरें अब राष्ट्रीय अध्य्क्ष अमित शाह के भाषण पर लगीं थी।

शाह ने नहीं कहा शिवराज का नेतृत्व!
अमित शाह जब भाषण देने आए तो इशारों में उन्होंने इतना तो कह दिया कि राकेश सिंह और नरेंद्र सिंह के भाषण के बाद अब कुछ भी कहने को नहीं बचा लेकिन उन्होंने पूरे उदबोधन में मुख्यमंत्री के कार्यों को तो जमकर सराहा पर शिवराज के नेतृत्व में ही 2018 कि वैतरणी पार हो इस बारे में कुछ भी नहीं कहा। पूरे उद्बोधन में वह कार्यकर्ता के दम पर चुनाव जीतने, विकास के दम पर चुनाव जीतने की बात करते रहे पर सीधे तौर पर शिवराज के नेतृत्व के बारे में चुप्पी साध ली। राजनीतिक गलियारे में अमित के इस उद्बोधन के कई मायने निकाले जा रहे हैं ।

विजयवर्गीय और नोरोत्तम ही मंच पर
मंच पर एक ओर खास दृश्य भी नजर आया। वैसे तो यहां शिवराज केबिनेट के कई मंत्री स्थल पर मौजूद थे लेकिन शाह के साथ मंच साझा करते हुए सिर्फ नोरोत्तम मिश्रा ही नजर आए। बाद में राजेंद्र शुक्ला पहुंचे। गौर करने वाली बात यह है कि सिर्फ नोरोत्तम मिश्रा को मंच पर बैठाने के क्या मायने थे। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राकेश सिंह को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के बाद नोरोत्तम खेमा नाराज चल रहा था। शाह की सभा के बहाने इसे साधने की कोशिश हो सकती है। एक और दृश्य भी यहां चर्चा के लिए काफी था। मंच पर कैलास विजयवर्गीय को काफी तवज्जो दी गई और यहां भी साफ है कि शिवराज सिंह को बदलने की जब जब चर्चा होती है तब तब विजयवर्गीय का नाम आता है लेकिन कुछ रोज की चर्चा के बाद सब कुछ शांत हो जाता है। 3 दिनों से कभी डिप्टी सीएम तो कभी सीएम को बदलने की खूब चर्चा चल रहीं हैं ऐसे में विजयवर्गीय और नोरोत्तम का मंच पर बैठना फिर से नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।

क्या शिवराज की बॉडी लैंग्वेज में नहीं था उत्साह?
आफ दी रिकार्ड अमित शाह के दौरे के दौरान शिवराज की बॉडी लैंग्वेज भी वैसी नजर नहीं आई जैसी अमूमन होती है। उनका उद्बोधन जो अक्सर बिना कागज का होता है वह इस बार फाइलों से साथ नजर आया। शिवराज की बॉडी लेंग्वेज में उत्साह कम चिंता ज्यादा नजर आ रहीं थीं। बहरहाल इन सब कयासों की मंच के आसपास भी चर्चा खूब चलीं।

कुछ तो गड़बड़ है अब आगे क्या होगा
लब्बोलुआब यह कि भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनावी टिप्स देने आए अमित शाह का यह भोपाल प्रवास आने वाले दिनों में बीजेपी की राजनीति के लिए कई संकेत लेकर आने वाला प्रतीत होता है। समय के साथ सब कुछ साफ हो जाएगा। जो भी हो मुख्यमंत्री को हटाने या फिर डिप्टी सीएम की नियुक्ति को लेकर फिलहाल तो चर्चा थामने में मुख्यमंत्री कामयाब होते दिखे। अब देखना है आगे क्या होता है।

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