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ऐतिहासिक असीरगढ़ किला को एडॉप्ट टू ए हैरिटेज योजना में शामिल करने की मांग

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार की एडॉप्ट टू ए हैरिटेज योजना के तहत इंदौर इच्छापुर स्टेट हाईवे पर स्थित ऐतिहासिक व अजेय किला असीरगढ़ को भी शामिल किए जाने की मांग शहर के पुरात्व प्रेमियों ने की है. उनका कहना है इस योजना में असीरगढ़ का किला शामिल हो जाता है तो किले का उद्धार हो जाएगा.

इस मामले में स्थानीय विधायक व महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने कहा बुरहानपुर को हैरिटेज सिटी घोषित कराने को वह काफी मेहनत कर रहीं हैं.असीरगढ़ जैसी अन्य धरोहरों के रखरखाव और सुरक्षा का सरकार के साथ-साथ समाज का भी दायित्व है.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित गांव असीरगढ़ का ऐतिहासिक क़िला बहुत प्रसिद्ध है. असीरगढ़ क़िला बुरहानपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है. यह जनपद के उत्तर दिशा में सतपुड़ा पहाड़ियों के शिखर पर समुद्र सतह से 250 फ़ुट की ऊँचाई पर स्थित है. यह क़िला आज भी अपने वैभवशाली अतीत की गुणगाथा का गान मुक्त कंठ से कर रहा है. इसकी गणना विश्व विख्यात उन गिने चुने क़िलों में होती है जो दुर्भेद और अजेय माने जाते थे.

इतिहासकारों ने इसका ‘बाब-ए-दक्खन’ (दक्षिण द्वार) और ‘कलोद-ए-दक्खन’ (दक्षिण की कुँजी) के नाम से उल्लेख किया है क्योंकि इस क़िले पर विजय प्राप्त करने के पश्चात दक्षिण का द्वार खुल जाता था. इसके विजेता का सम्पूर्ण ख़ानदेश क्षेत्र पर अधिपत्य स्थापित हो जाता था.


कुछ इतिहासकार इस क़िले को महाभारत के वीर योद्धा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा की अमरत्व की गाथा से संबंधित करते हुए उनकी पूजा स्थली बताते हैं. वहीं बुरहानपुर के ‘गुप्तेश्वर महादेव मंदिर’ के समीप से एक सुंदर सुरंग है, जो असीरगढ़ तक गई है. ऐसा कहा जाता है कि पर्वों के दिन अश्वत्थामा ताप्ती नदी में स्नान करने आते हैं. बाद में ‘गुप्तेश्वर’ की पूजा कर अपने स्थान पर लौट जाते हैं.