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शिवराज की मंत्रियों को नसीहत, याद दिलाई पिछली बार की हार

भोपाल।एक दिन पहले मंत्रियों, विधायकों और जिलाध्यक्षों के साथ बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 घंटे के भीतर ही दोबारा मंत्रियों को बुलवा लिया। सीएम हाउस में मंगलवार दोपहर 2 बजे से बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को स्पष्ट कर दिया कि वे क्षेत्र के साथ प्रभार के जिलों का भी पूरा ध्यान रखें। महीने में सात दिन जिलों में रहें। एक विधानसभा में एक दिन दें।

कार्यकर्ताओं के साथ बैठक हो और कम से कम 400-500 लोगों के साथ भोजन भी करें। परिश्रम करेंगे तो चुनाव में भी ठीक रहेगा। सीएम यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे दो टूक कहा कि पिछली बार (2013 के विधानसभा चुनाव) 10 मंत्री चुनाव हार गए थे। मैंने खुद हरिशंकर खटीक, अजय विश्नोई और बृजेंद्र प्रताप सिंह से कहा था कि क्षेत्र बदल लो। विश्नोई तो कह रहे थे कि 30 हजार वोटों से जीतेंगे। इसलिए अभी से ध्यान रखें।

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री यह बोलते समय वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार को देख रहे थे। बैठक के बाद इसकी चर्चा भी रही। बैठक के दौरान आधा दर्जन से ज्यादा मंत्री नहीं पहुंचे। इसमें गोपाल भार्गव, गौरीशंकर बिसेन, यशोधरा राजे सिंधिया, कुसुम मेहदेले और माया सिंह शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये क्यों नहीं पहुंचे, उनके बारे में पता करके मुझे बताएं। फिर मैं बात करूंगा। एक दिन पहले सोमवार को सीएम हाउस में विधायकों और जिलाध्यक्षों की बैठक में भी कई विधायक नहीं थे। तब भी मुख्यमंत्री ने यही बात कही थी कि नहीं आने वाले विधायकों के नाम बताएं। मुख्यमंत्री के इस तल्ख रूख की पार्टी के भीतर काफी चर्चा है। मंत्रियों की बैठक के बारे में बताया जा रहा है कि सीएम सचिवालय से कुछ मंत्रियों को फोन भी किए गए, लेकिन वे नहीं पहुंचे। मंत्रियों को बैठक की सूचना सोमवार रात 11 बजे दी गई थी।

प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने पार्षदों की बैठक बुलाई, 55 में से सिर्फ 8 ही पहुंचे

पार्टी के कार्यक्रमों और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने मंगलवार को भोपाल की बैठक बुलाई। कुल 55 पार्षदों में से सिर्फ 8 ही पहुंचे। यह देख राकेश सिंह नाराज हो गए। साथ ही कहा कि यह ठीक नहीं है। लिहाजा बुधवार को दोबारा पार्षदों की बैठक बुलाई गई है। मंगलवार की बैठक में मंडल के लोग पहुंचे थे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के कार्यकर्ताओं ने हमेशा संपूर्ण क्षमता का परिचय दिया है, जिसकी चर्चा होती है। अमित शाह के कार्यक्रम को गरिमा और भव्यता देने के लिए कार्यकर्ताओं को संकल्पित होना है। यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश में 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। बैठक में संगठन महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश उपाध्यक्ष विजेश लुनावत व रामेश्वर शर्मा, प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा समेत अन्य नेता कार्यक्रम में मौजूद रहे।

मंत्रियों को नसीहत भी दी
चुनाव का समय आ गया है, टूट पड़ो। आप ही लोग हैं जो पूरी ताकत से लग सकते हैं। कम से कम प्रभार के जिलों पर ध्यान दें। आने वाले दिनों में श्रमिकों और असंगठित मजदूरों के बड़े कार्यक्रम हैं। मई से जून तक विकास यात्राएं हैं। सक्रियता रहेगी तो सफलता भी मिलेगी।

कमलनाथ की रणनीति देख लें, फिर अगली बैठक

भाजपा चुनाव प्रबंध समिति की पहली बैठक विपक्ष की रणनीति पर केंद्रित रह गई। मुख्यमंत्री ने एक घंटे तक सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के बारे में बताया और फिर कहा कि कमलनाथ ने पद संभाल लिया है। उनका दमखम देख लें, फिर रणनीति तैयार करेंगे। समिति के संयोजक व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता जुट जाएंगे तो जीत निश्चित है। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने बैठक के बाद बताया कि 4 मई को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भोपाल आ रहे हैं। वे प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे, उसी तैयारियों को लेकर चर्चा हुई है।

साथ ही 14 मई को होने वाले ‘चलो पंचायत अभियान’ के बारे में विचार किया गया। प्रदेश की 23 हजार पंचायतों में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधि प्रत्येक पंचायत में गठित स्पेशल 11 टीम के साथ बैठक कर हितग्राही सम्मेलनों में भाग लेंगे। आगामी 15 मई से 15 जून के बीच प्रत्येक विधानसभा में विकास यात्राएं निकलने वाली है। राकेश सिंह ने कमलनाथ को लेकर निशाना भी साधा और कहा कि विपक्ष का धन-शक्ति से लेना-देना है, जबकि भाजपा जनशक्ति पर विश्वास रखती है।