कुटेश्वर DAV प्रिंसिपल के बिगड़े बोल अभिभावकों से कहा-आवेदन पत्र को ताबीज बनाकर गले मे लटका लो..!

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बरही। आज डीएवी स्कूल कुटेश्वर के प्राचार्य ने अभिभावकों से अशोभनीय भाषा का प्रयोग कर दिया, जिसे लेकर यहां आक्रोश है। बताया गया कि मनमानी पर उतारू डीएवी स्कूल कुटेश्वर के प्राचार्य द्वारा सँस्कृत विषय बन्द करने एवं बेतहासा फीस वृद्धि का विरोध करने पहुंचे अभिभावकों को जो शब्द कहे वह कोई भी पढ़ा लिखा सभ्य व्यक्ति नहीं कह सकता। गौरतलब है कि प्रबन्धन ने इस सत्र से संस्कृत विषय बंद करने फरमान सुना दिया है।

सुनकर, जानकर बेहद ताज्जुब होगा की जिस भारतीय सभ्यता व संस्कृति के व्यापक प्रचार-प्रसार का उद्देश्य लेकर आर्य समाज द्वारा दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय(डीएवी) की स्थापना की गई थी, उस उद्देश्य की धज्जियां उड़ाने का कारनामा सेल के उपक्रम कुटेश्वर माइंस द्वारा संचालित डीएवी स्कूल ग़ैरतलाई के प्राचार्य कर रहे है।

भारतीय सभ्यता व संस्कृति की अहम पहचान संस्कृत विषय की पढ़ाई पर ग्रहण लगाने का काम कर रहे है, जी हां वर्तमान शिक्षण-सत्र से अचानक संस्कृत विषय की पढ़ाई कक्षा 9 से बंद करा दिया, जिसका तीव्र विरोध न सिर्फ विद्यार्थी कर रहे है, वल्कि उनके अभिभावक भी कर रहे है। जबकि ज्यादातर विद्यार्थी संस्कृत विषय का अध्ययन करने की इच्छा जाहिर कर चुके है, लेकिन स्कूल प्राचार्य विद्यार्थियों पर संस्कृत के स्थान पर हिंदी विषय की ही पढ़ाई करने का दबाव डाल रहे है।

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इस मुद्दे को लेकर दो दिन पूर्व ही विद्यार्थियों की रुचि को देखते हुए उनके अभिभावकों ने स्कूल प्राचार्य से मुलाकात कर संस्कृत विषय की पढ़ाई कराने की चर्चा करते हुए लिखित में निवेदन-पत्र भी सौपा, लेकिन विद्यालय प्राचार्य कमरों की कमी का हवाला देते हुए अड़ियल रवैया अपनाए हुए है, जिसे लेकर विद्यार्थियो व अभिभावकों में आक्रोश है।

अमर्य्यादित, अशोभनीय व्यवहार स्कूल प्राचार्य से जब इस मुद्दे को लेकर अभिभावक चर्चा करने पहुचे और उन्हें लिखित आग्रह-पत्र सौपा, तो प्राचार्य ने अपने पदीय गरिमा का ध्यान न रखते हुए अमर्यादित व अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते हुए यह कह दिए कि आवेदन पत्र अपने पास रखे और इसकी ताबीज बनाकर गले मे लटका लो।

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इस दौरान अभिभावकों ने वहाँ संयम का परिचय दिया, लेकिन प्राचार्य की अशोभनीय भाषा उन्हें नागवार गुजरी, जिसकी शिकायत कुटेश्वर माइंस के जीएम श्री शर्मा से की। गेम प्लान के तहत संस्कृत पर लगा रहे ग्रहण आरोप है कि प्राचार्य पूरे एक प्लान के तहत संस्कृत विषय पर ग्रहण लगा रहे है, जबकि आर्य समाज दयानंद एंग्लो वैदिक विद्यालय की आत्मा संस्कृति व सभ्यता ही है।

आरोप है कि प्राचार्य अपने किसी करीबी हिंदी विषय के टीचर को स्कूल में ज्वॉइन कराने के लिए संस्कृत विषय की जगह हिंदी विषय का अध्यापन करने का दबाव विद्यार्थियों पर डाला जा रहा है। वही कमरों की कमी होने का दिया गया हवाला भी सभी के समझ से परे है।

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साढ़े 10 बजे तक नर्सरी से क्लास सेकंड तक की छुट्टी होने के बाद कई कमरे खाली पड़े रहते है, वही कमेस्टि लैब में भी अध्यापन के लिए पर्याप्त इंतजाम है। इधर फीस वृद्धि को लेकर विरोध एक ओर जहां संस्कृत विषय पर ग्रहण लगाने का कारनामा किया जा रहा है, तो वही दूसरी ओर बेतहासा फीस वृद्धि को लेकर भी आक्रोश के स्वर फूटने लगे है।

आज शुक्रवार की सुबह ग़ैरतलाई, जारारोडा, बढ़छड़ के दर्जनभर अभिभावकों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौपकर फीस वृद्धि वापस लेने की मांग की है, ज्ञापन में कहा गया है कि मांग पूरी नही होने पर आंदोलन किया जावेगा। ज्ञापन सौपने वालो में अतुल द्विवेदी, चंद्रशेखर जायसवाल, सुजीत परौहा कल्लू, रावेंद्र द्विवेदी, रत्नेश श्रीवास्तव, राधिका दुबे, हजारीलाल साहू, जागेश्वर सेन, प्रमोद गुप्ता, हरिओम गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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