राहुल को अपनी मां से बहुत कुछ सीखना होगा- दिग्विजय सिंह

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नई दिल्‍ली। नर्मदा परिक्रमा के बाद ओंकारेश्वर में अपना आखिरी धार्मिक अनुष्ठान करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह बहुत बदले हुए से दिखाई दे रहे हैं. 192 दिनों तक तीन हजार किमी की पैदल यात्रा कर उनके पैरों के तलवे पूरी तरह छिल चुके हैं. शरीर धूप और गर्मी में झुलस कर अपना रंग बदल चुका है. उनका वजन कम हो चुका है. कहा जा सकता है कि नर्मदा परिक्रमा ने उन्हें कुछ ज्यादा ही आडंबरहीन बना दिया है. वे धोती-कुर्ते के लिबास में किसी सामान्य परिक्रमावासी की तरह भीड़ में खो जाते हैं.
जोशिला बना दिया
वे नरसिंहपुर के बरमान घाट पर यात्रा पूरी कर हरदा होते हुए ओंकारेश्वर सुबह साढ़े छह बजे पहुंचे हैं. क्योंकि जगह जगह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के स्वागत ने उन्हें रात में सोने का मौका नहीं दिया है. उनकी आंखे पूरी तरह से लाल हो चुकी हैं, लेकिन इस अनथक यात्रा ने उन्हें कुछ ज्यादा ही जोशिला और आत्मविश्वास से भरपूर बना दिया है. उनसे मिलने उनके परिजनों मित्र आए हुए हैं. तो कांग्रेस नेताओं की भी खासी भीड़ लगी हुई है. वे अपने हर कार्यकर्ता से खुलकर मिल रहे हैं, बहुत बुलंद आवाज में हर एक का नाम लेकर कह रहे हैं कि अब सेल्फी बहुत हो चुकी. मीडिया के बार बार दोहराने वाले सवालों का बहुत ही धैर्य और उत्साह से सामना कर रहे हैं.मैं अब कम बोलूंगा
नर्मदा किनारे बने एनएचडीसी के गेस्ट हाउस में  मीडिया से बातचीत के जवाब में सिंह ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा के बाद उनका एक अलग रूप सामने होगा. मैं अब कम बोलूंगा. याने पहले ज्यादा बोल रहे थे. इस पर वे हंसते हुए कहते हैं कि नहीं छह महीने पहले जो उन्होंने कहा है वह पूरी तरह से तथ्यात्मक है, लेकिन वे सोचते हैं कि यह सब कहना टाला जा सकता था. हर बात का जवाब उन्हें देने की जरूरत नहीं थी. एक प्रवक्ताओं की टीम है जो अपना काम कर रही है. वे दावा करते हैं कि उन्हें बोलने का कोई मलाल नहीं है लेकिन वे बेवजह संघ भाजपा के निशाने पर आते गए. उनकी बातों को राजनीतिक फायदे के लिए तोड़ा मरोड़ा गया.

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अपनी टीम बनानी होगी
कांग्रेस अध्य्क्ष राहुल गांधी में वे क्या खूबियां देखते हैं, इसके जवाब में वे कहते हैं कि सिद्धांतों और मूल्यों के स्तर पर राहुल गांधी का कोई मुकाबला नहीं है. वे राजनीतिक कसौटी पर खरे उतरते हैं. लेकिन अब बहुत कुछ उन्हें अपनी मां से सीखना होगा. विपरीत हालातों में अपनी ताकत जुटानी होगी. सबसे पहले तो उन्हें अपनी टीम बनानी होगी. जिसके दम पर मुकाबला किया जा सके.

मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं
राहुल गांधी की नई टीम में उनकी भूमिका के सवाल पर वे कहते हैं कि जो काम उन्हें सौंपा जाएगा वे करेंगे. पिछले 14 साल से वे केंद्र में संगठन की राजनीति कर रहे हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से साफ इंकार करते हुए वे इस रेस से बाहर हैं. वे दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब इस पद के लिए मैदान में नहीं हैं. हां कांग्रेस की मजबूती के लिए वे अपनी नई राजनीतिक यात्राएं वे शुरू करने जा रहे हैं.

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यादव की टीम बेहतर
मध्यप्रदेश में सीएम चेहरा प्रोजेक्ट करने वे चुनाव मैनेजमेंट के मुद्दे पर वे थोड़े आवेश में कहते हैं- यह सिर्फ मीडिया का शगूफा है. नजदीक ही मौजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव को देखते हुए वे कहते हैं कि ये हैं, पूरा संगठन हैं जो बेहतर काम कर रहा है. हम सब मिलकर चुनाव लडेंगे जीतेंगे. हमारे बीच कोई गुटबाजी नहीं है. वे एक फेविकोल की तरह सभी गुटों को एकसाथ जोड़कर चुनावी टीम बनाने का प्रयास करेंगे.

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