मध्यप्रदेश में एक लाख से अधिक वकील हड़ताल पर, 14 अप्रैल तक न्यायालय से विरत

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जबलपुर। मध्यप्रदेश में न्यायरथ के पहिए थम गए। राज्य के एक लाख वकील 9 से 14 अप्रैल तक हड़ताल पर चले गए। इस वजह से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर, खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर के अलावा जिला अदालत जबलपुर सहित राज्य की सभी जिला व तहसील अदालतों में सन्नाटा पसरा रहा।

सोमवार को प्रतिवाद दिवस के पहले दिन किसी भी अदालत में वकील पैरवी करने नहीं गए। वे 14 अप्रैल तक निरंतर न्यायिक कार्य के बहिष्कार पर अड़े नजर आए। इस बीच हाईकोर्ट की तरफ से विधिवत प्रेस-नोट जारी करके 9 से 14 अप्रैल तक हड़ताल से होने वाले न्यायिक नुकसान के आंकड़े जारी किए। इसके बावजूद वकील अपनी मांगें पूरी होने तक अपना निर्णय वापस न लेने पर अड़ गए।

पूर्व घोषणा के मुताबिक सोमवार को सुबह 10.30 बजे स्टेट बार कौंसिल के सभाकक्ष में स्टेट बार सदस्यों की बैठक हुई। इस दौरान परस्पर विमर्श के बाद सर्वसम्मति से सामान्य-सभा में अंतिम निर्णय पर मुहर लगा दी। इससे पूर्व स्टेट बार के कुछ सदस्य प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के प्रतिवाद दिवस की राय जाहिर कर रहे थे। लेकिन बहुमत के आधार पर वे भी 9 से 14 अप्रैल तक निरंतर बहिष्कार के मुद्दे पर एकराय हो गए।

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स्टेट बार प्रांगण में सामान्य सभा

एमपी स्टेट बार कौंसिल के प्रांगण में सामान्य सभा आयोजित की गई। इसमें हाईकोर्ट की मुख्यपीठ और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर के अलावा राज्य की सभी जिला व तहसील अदालतों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने बारी-बारी से अपने विचार रखे और अंतत: 9 से 14 अप्रैल तक न्यायिक कार्य के बहिष्कार का समर्थन किया।

सड़कों पर उतरेंगे, भोपाल में घेराव करेंगे

अधिवक्ता संघों के अध्यक्ष व सचिवों का मत यही था कि लंबे अर्से से सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला, अत: इस बार आर-पार की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। यदि आवश्यकता हुई तो राज्य के एक लाख वकील सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन और भोपाल पहुंचकर धरना और घेराव भी करेंगे।

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जेल भेजो या फांसी पर चढ़ा दो नहीं बदलेगा निर्णय

हाईकोर्ट बार जबलपुर के अध्यक्ष आदर्शमुनि त्रिवेदी और हाईकोर्ट बार इंदौर के अध्यक्ष अनिल ओझा सहित अन्य ने दो टूक कहा कि हाईकोर्ट चाहे अवमानना कार्रवाई करके जेल भेज दे या फिर फांसी पर लटकाने का आदेश सुना दे, लेकिन किसी भी सूरत में 9 से 14 अप्रैल तक की हड़ताल वापस नहीं होगी।

अब सिर्फ अधिवक्ता हित नहीं बल्कि सम्मान की लड़ाई

आक्रोशित अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने कहा कि अब मामला सिर्फ अधिवक्ता हित का नहीं बल्कि अधिवक्ता सम्मान की लड़ाई में बदल गया है। जिस तरह हाईकोर्ट ने अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी और अधिवक्ताओं की सर्वोच्च संस्था स्टेट बार के चेयरमैन व सदस्यों पर आक्षेप लगाए, उससे एक लाख वकीलों का अपमान हुआ है।

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इन्होंने रखे अपने विचार

सामान्य सभा में हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष रमन पटेल, नरसिंहपुर बार अध्यक्ष रामस्वरूप ठाकुर, विदिशा बार अध्यक्ष महेन्द्र जैन, सागर बार सचिव रामकुमार, दमोह बार अध्यक्ष कमलेश भारद्वाज, जबलपुर बार सचिव मनीष मिश्रा, बालाघाट बार अध्यक्ष ब्रजेश, मंडला बार अध्यक्ष राकेश तिवारी, छिंदवाड़ा बार अध्यक्ष राजेन्द्र बैस के अलावा विजयराघौगढ़, गढ़ाकोटा और शहडोल आदि के बार पदाधिकारियों ने विचार रखे। जबलपुर के अधिवक्ता बसंत डेनियल ने हड़ताल का समर्थन किया। संचालन हाईकोर्ट बार जबलपुर के पूर्व सचिव मनीष तिवारी ने किया।

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