MP में राज्यमंत्री बने बाबाओं की जानिये पूरी लाइफस्टाइल

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भोपाल। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा दांव खेला है। राज्य सरकार ने आज साधु-संतों को लुभाने के लिए 5 हिन्दू महात्मा और धार्मिक नेताओं को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया। शिवराज के इस फैसले के बाद राजनीति गलियारों में चर्चाएं भी काफी तेज हो गई हैं। विपक्ष सरकार के इस फैसला का विरोध कर रहा है। खास बात यह है शिवराज ने जिन पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उनमें से 2 तो सरकार पर नर्मदा घोटाला का आरोप लगा यात्रा निकाल चुके हैं। पढ़िए इन पाचों बाबाओं का कैसा है लाइफस्टाइल :-
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AAP में टिकट चाहते थे कंप्यूटर बाबा 
इन पाचों बाबाओं में सबसे प्रचलित नाम है कंप्यूटर बाबा का। 54 वर्षीय बाबा को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि वो हमेशा अपने साथ एक लैपटॉप रखते हैं। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि उनका दिमाग कंप्यूटर जैसा तेज है। कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है और वह इंदौर के रहने वाले हैं। वह 2013 में चर्चाओं में तब आए थे जब उन्होंने कुंभ मेले के दौरान घाट पर हेलिकॉप्टर लैंड कराने की अनुमति ली थी जिसके बाद उन्होंने घाट पर स्नान किया। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान कंप्यूटर बाबा आप से टिकट चाहते थे और उस समय वो बीजेपी और आरएसएस पर जम कर कटाक्ष भी करते थे। बताया जा रहा है कि नर्मदा घोटाला रथ-यात्रा शुरू करने वाले थे लेकिन इससे पहले ही शिवराज सरकार ने यात्रा न करने की ‘डील’ कर बाबा को राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया।
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भय्यूजी महाराज बौद्ध धर्म स्वीकार करने की दे चुके हैं धमकी
वहीं राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले भय्यूजी महाराज को ताकतवर संतों में गिना जाता है। उनका असली नाम उदय सिंह देशमुख है जो पूर्व मॉडल हैं और जमींदार परिवार से ताल्‍लुक रखते हैं। भय्यूजी अपनी  जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं उनका इंदौर में शानदार आश्रम है। कहा जाता है कि भय्यू महाराज कई सालों से मध्य प्रदेश सरकार की उपेक्षा से काफी नाराज थे जिसे लेकर उन्होंने राज्य सरकार पर कई बार हमले बोले। यही नहीं एक बार राज्य सरकार से नाराज होकर उन्होंने बौद्ध धर्म स्वीकार करने तक की धमकी दे डाली थी। वहीं 2011 में अन्‍ना हजारे ने जब लोकपाल के मसले पर उपवास किया था तब उसको खत्‍म कराने में भी भय्यूजी महाराज ने हस्तक्षेप किया था।
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शिवराज सरकार के अभियान का हिस्सा रह चुके हैं हरिहरनंद महाराज
राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले हरिहरनंद महाराज सरकार द्वारा पूर्व में चलाए गए अभियान का हिस्सा रह चुके हैं। वह उस 50 लोगों के समूह में शामिल थे जिन्‍होंने बसे व्यापक संरक्षण अभियान ‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ की अगुआई की थी। इस यात्रा की शुरुआत 11 दिसंबर, 2016 को हुई थी और इसका समापन 11 मई, 2017 को हुआ। 144‍ दिनों की यह पैदल यात्रा अमरकंटक से सोंडवा और वहां से वापस अमरकंटक तक हुई। इस दौरान हरिहरानंदजी ने जनसभाओं और वर्कशॉप के जरिये लोगों को वृक्षारोपण, साफ-सफाई, मिट्टी और जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय और आर्गेनिक फार्मिंग के लिए प्रोत्‍साहित किया।
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‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ के संयोजक थे महंत योगेंद्र 
जिन योगेंद्र महंत को विशेष समिति में शामिल कर राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है वह ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ के संयोजक थे। उन्होंने शिवराज सरकार पर नदी संरक्षण अभियान में घोटाला करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पौधारोपण के लिए जारी फंड का दूसरे मद में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आगामी 1-15 मई के दौरान 45 जिलों में इस संबंध में रथ यात्रा आयोजित करने की घोषणा की थी। राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद महंत ने कहा कि नर्मदा नदी को बचाने के लिए समिति बनाए जाने की मांग प्रदेश सरकार द्वारा पूरी किए जाने के कारण यह यात्रा निरस्त कर दी गई है।
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आध्‍यात्मिक गुरू हैं नर्मदानंद महाराज 
नर्मदा की सफाई और अविरलता के लिए सक्रिय रहने वाले नर्मदानंद महाराज को भी राज्य सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। वह आध्‍यात्मिक गुरू हैं जो नित्यानंद आश्रम के लिए जाने जाते हैं। नर्मदानंद महाराज हनुमान जयंती और रामनवमी के मौकों पर यात्राएं आयोजित करते रहे हैं। कहा जा रहा है कि नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में पौधारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर काम करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।पिछले साल राज्‍य के विभिन्‍न हिस्‍सों में कई शोभा यात्रा आयोजित करवाईं और हनुमान जन्‍मोत्‍सव समिति और सनातन धर्म महासभा से जुड़े हैं

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