इंदौर हादसा पूरी रात चला बचाव कार्य 10 शव निकाले गए 15 लोगों के अभी भी दबे होने की आशंका

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इंदौर । सरवटे बस स्टैंड पर शनिवार रात चार मंजिला होटल की करीब 50 साल पुरानी बिल्डिंग ढह गई। एमएस नाम से यह होटल बस स्टैंड के ठीक सामने चौराहे पर बनी थी। हादसा रात नौ बजकर 14 मिनट 52 सेकंड पर हुआ। हादसे के कुछ मिनट पहले होटल के बाहर पार्क की जा रही एक कार के इस बिल्डिंग के पिलर से टकराने की जानकारी मिली है। प्रशासन इसे ही हादसे का कारण बता रहा है। आधी रात तक प्रशासन ने 10 मौतों की पुष्टि कर दी थी। इनमें दो महिलाएं हैं।

15 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। यह शहर के इतिहास का सबसे भयावह हादसा बताया जा रहा है।इससे पहले 1991 में अनूप नगर में निर्माणाधीन अनंतश्री बिल्डिंग गिर गई थी जिसमें 9 लोग मारे गए थे। प्रत्यशदर्शियों के मुताबिक घटना के वक्त 18 कमरों की इस होटल में कई मुसाफिर थे। रजिस्टर में 41 लोगों की एंट्री मिली है। घटना के वक्त होटल में कितने लोग मौजूद थे, यह स्पष्ट नहीं है। बिल्डिंग इतनी तेजी से गिरी कि किसी को बचने का मौका ही नहीं मिला।

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होटल की चपेट में गुजर रहे लोग भी आ गए। गिरने वाली होटल के पास स्थित एक अन्य होटल के कर्मचारी अजय राजपूत ने बताया कि अचानक तेज धमाके की आवाज आई। कमिश्नर संजय दुबे के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में किसी कार के बिल्डिंग के पिलर से टकराने की बात सामने आई है। विस्तृत जांच के बाद पूरी स्थिति सामने आएगी।

इनकी मौत 

राजू पिता रतनलाल (35), रुस्तम का बगीचा। हरीश सोनी (70)। सत्यनारायण चौहान (60) लुनियापुरा। आनंद पोरवाल (नागदा)। राकेश राठौर नंदबाग, इंदौर। दो महिलाओं और तीन पुरुषों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। मुकेश पिता रामलाल (42) राजनगर धर्मेन्द्र पिता देवराम (30) घायल हैं।

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कार मालिक बोला- मैं तो गाड़ी पार्क कर चला गया था…

जिस स्कोडा कार की टक्कर से होटल के पिलर को नुकसान की बात कही जा रही है वो एक अन्य होटल के मालिक अशोक अरोरा की निकली। वे रात पौने दो बजे सामने आए। अरोरा ने कहा कि वे तो गाड़ी पार्क कर के चले गए थे।

दो मंजिलें थीं, चार बना लीं

क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक होटल एमएस की पुरानी बिल्डिंग असल में दो मंजिला थी। धीरे-धीरे ऊपर निर्माण कर इसे चार मंजिला बना दिया गया। पुराने भवन के ऊपर ही नया निर्माण किया जाता रहा। होटल मालिक शंकर पारवानी से देर रात तक संपर्क करने की कोशिश की जाती रही, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

जिम्मेदारों के बयान अलग-अलग

हादसे के मामले में जिम्मेदार अलगअलग बयान देते रहे।

  • 11.00 बजे : निगमायुक्त मनीष सिंह बोले ऐसी कई इमारतें, सबकी जांच संभव नहीं।

  • 11.30 बजे : महापौर मालिनी गौड़ और विधायक उषा ठाकुर ने कहा कि बिल्डिंग जर्जर नहीं थी और न ही खतरनाक भवनों की सूची में थी।

  • 12.30 बजे : डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने घटनास्थल पर कहा कि बिल्डिंग जर्जर थी और 50 वर्ष पुरानी थी।

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पूरे घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल था। एक बार तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही महापौर मालिनी गौड़, क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर के अलावा कलेक्टर निशांत वरवड़े, डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्र, निगम कमिश्नर मनीष सिंह सहित पूरा अमला पहुंच गया था।

काफी सघन इलाका होने के कारण यहां ये काफी बड़ा हादसा माना जा रहा है। चूंकि बस स्टैंड वाला इलाका है लिहाजा यहां बड़ी संख्या में होटले हैं और लोगों की आवाजाही भी रहती है।

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