जनसुरक्षा अधिनियम से खतरे में पड़ जाएगी महिलाओं की निजता

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भोपाल। राज्य शासन के प्रस्तावित मध्यप्रदेश जनसुरक्षा एवं संरक्षा विनियमन विधेयक से महिलाओं की निजता खतरे में पड़ जाएगी। दरअसल, इसके तहत किराए के आवासों या हॉस्टल में रहने वाली कामकाजी महिलाओं व स्टूडेंट्स की जानकारी थाने में देना अनिवार्य किया जा रहा है।

यही नहीं किराए के आवासों में रहने वाली महिलाओं को ओला या उबर टैक्सी लेने पर ड्राइवरों को अपनी पूरी जानकारी भी देना होगी। हालांकि सेंट्रल प्रेस क्लब में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि किसी को किसके घर में घुसने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

लोगों की परेशानी बढ़ेगी

राज्य शासन के पास विचाराधीन जनसुरक्षा विधेयक में कुछ अन्य ऐसे प्रस्तावित नियम हैं, जिनसे न केवल महिलाओं बल्कि व्यापारियों व जनसामान्य के लिए परेशानियां बढ़ेंगी। दअरसल, इसके अंतर्गत जनसुरक्षा व संरक्षा ब्यूरो का गठन किया जाएगा, जिसका प्रमुख आईजी स्तर का अधिकारी होगा।

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यह डीजीपी के अधीन काम करेगा। इसमें अपील की अवधि 30 दिन रहेगी और प्रदेश के किसी भी हिस्से के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यहीं अपील हो सकेगी। ब्यूरो द्वारा सुरक्षा के मापदंड तय किए जाएंगे जिसमें दुकानदार, संस्थान, धार्मिक व शिक्षण संस्थान को बाउंड्रीवॉल, फेंसिंग के अलावा सुरक्षाकर्मियों, सीसीटीवी, मेटल डिटेक्टर, प्रवेश नियंत्रण आदि लगाने की अनिवार्यता की जाएगी।

बिना वारंट गिरफ्तारी

प्रस्तावित अधिनियम में पुलिस को यह भी अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया है कि किसी भी प्रकार के उल्लंघन पर संज्ञेय अपराध माना जाएगा और संबंधित व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकेगा। यही नहीं किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की गई कार्रवाई के चुनौती भी नहीं दी सकेगा।

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बिना मुंडेर के कुएं पर सजा

जनसुरक्षा अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर कोई किसान अपने खेत में कुएं, तालाब, बोरवेल आदि पर दीवार या फेंसिंग नहीं करता है तो उसे तीन साल की सजा तक हो सकेगी। यहीं किसी भी सवारी वाहन या लोडिंग वाहन को आवश्यकता से ज्यादा समय तक कहीं खड़ा किया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई करने का प्रावधान अधिनियम में किया गया है।

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