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सोनिया के सिपहसालारों की छुट्टी करेंगे राहुल गांधी!

वेब स्रोत। राहुल गांधी ने जो वादा 4 साल पहले किया था उस पर कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद अमल कर रहे हैं. कांग्रेस संगठन में भारी बदलाव करते हुए राहुल गांधी ने 24 अकबर रोड में दशकों से जमे जनार्दन द्विवेदी और बी के हरिप्रसाद की महासचिव पद से छुट्टी कर दी है. सूत्रों के मुताबिक अब दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद, अम्बिका सोनी, सीपी जोशी और मोहन प्रकाश की महासचिव पद से छुट्टी भी लगभग तय है.

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे राहुल गांधी ने संगठन को “नया लुक, युवा लुक” देने शुरुआत पहले ही कर दी थी. लेकिन अब फैसले लेकर वह साबित कर रहे हैं कि कांग्रेस के असली बॉस वही हैं न कि सोनिया गांधी.

जनार्दन द्विवेदी इंदिरा गांधी के जमाने से कद्दावर नेता रहे हैं. सोनिया गांधी के राजनीतिक भाषण वही तैयार करते थे लेकिन वक्त बदला तो उनकी भूमिका सीमित हो गई. फिलहाल वह सिर्फ संगठन के महासचिव ही थे, मीडिया डिपार्टमेंट और राज्यों का प्रभार उनसे पहले ही ले लिया गया था. हाल ही में वह राज्यसभा से भी रिटायर हुए हैं.

कर्नाटक से आने वाले बीके हरिप्रसाद को भी राजीव गांधी का करीबी माना जाता था, लिहाज़ा सोनिया गांधी ने उन्हें कई राज्यों का प्रभार सौंपा था. बदलाव की आंधी में हरिप्रसाद भी अपना विकेट नहीं बचा पाए.

राहुल गांधी कई बार कह चुके हैं कि वह युवाओं को आगे लाना चाहते हैं. महाराष्ट्र से आने वाले और कुछ समय पहले तक तक यूथ कांग्रेस की कमान संभालने वाले राजीव सातव को गुजरात का प्रभारी बनाना भी उसी दिशा में एक कदम है. युवा वेणुगोपाल को राहुल पहले ही कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी नियुक्त कर चुके हैं. वहीं ओडिशा का प्रभार एक और युवा नेता भंवर जितेंद्र सिंह को सौंपा गया है.

 कुछ महीने पहले युवा नेता आरपीएन सिंह को राहुल गांधी ने झारखंड का प्रभारी बनाया था. सचिन पायलट, अशोक तंवर और अरुण यादव जैसे कई युवा नेता राहुल की टीम का हिस्सा काफी पहले बन चुके हैं. दलित नेता के राजू अब राहुल गांधी के दफ्तर का काम देखेंगे.

अब आज़ाद, दिगविजय, अम्बिका सोनी जैसे कद्दावर नेताओं का महासचिव पद से हटना तय माना जा रहा है. सवाल ये है कि अब ये कांग्रेस के किस काम आएंगे? अशोक गहलोत से राहुल ने गुजरात का प्रभार भले ही ले लिया हो लेकिन उन्हें संगठन महासचिव बनाकर गुजरात में उनकी मेहनत का इनाम दिया है. बड़े पदों पर बैठे सभी नेताओं की कुर्सी डगमगा रही है. आने वाले दिनों में मिलिंद देवरा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, रणदीप सुरजेवाला, दीपेंद्र हूडा, गौरव गोगोई, सचिन राव, प्रकाश जोशी सहित तमाम युवा चेहरे बड़ी जिम्मेदारी पाएंगे.

राहुल गांधी ज्यादातर राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष भी बदलने वाले हैं. यूपी,बिहार सहित अन्य राज्यों को युवा अध्यक्ष मिल सकते हैं. संगठन को नया तेवर और कलेवर देकर राहुल 2019 में मोदी के मुकाबले से लिए सभी तैयारी मुकम्मल कर लेना चाहते हैं.

बदलाव की इस बयार में अनुभवी नेताओं की भूमिका क्या होगी, ये अब भी बड़ा सवाल है? बीजेपी की तरह कांग्रेस में फिलहाल कोई मार्गदर्शन मंडल नहीं है.

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