प्रिंटिंग प्रेस से सेंटर्स तक ऐसे पहुंचते हैं CBSE बोर्ड के पेपर्स

Advertisements

नई दिल्‍ली। सीबीएसई के दो पेपर्स के लीक होने से देशभर में तहलका मच गया है. क्लास 10 का मैथ्स और 12 का इकोनॉमिक्स का पेपर लीक हुआ है. सीबीएसई ने इन पेपर्स को फिर से कराने की घोषणा की है लेकिन उसकी साख पर तो धक्का लगा ही है. साथ ही पेपर तैयार कराने से इसे छापने और एग्जाम सेंटर्स तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है.

क्या है प्रक्रिया
– पिछले साल तक सीबीएसई मेल के जरिए एग्जाम पेपर्स सीधे परीक्षा केंद्रों पर भेजता था. वहां उन्हें प्रिंट किया जाता था, लेकिन सीबीएसई ने इसमें भी खामियां पाईं और उसने इस साल से यह व्यवस्था बंद कर दी.
– इस साल सीबीएसई ने पेपर सेट करने से लेकर उसे डिस्ट्रीब्यूट करने की जो प्रक्रिया शुरू की है वो इस तरह है


क्या होता है सबसे पहले
– सीबीएसई अपने एक्सपर्ट टीचर पैनल से पेपर सेट कराता है. एक विषय के तीन सेट पेपर तैयार कराए जाते हैं. हर परीक्षा केंद्र को तीनों सेट पेपर भेजे जाते हैं, वो इस तरह बांटे जाते हैं कि सभी परीक्षार्थियों के पास एक जैसे पेपर नहीं हों.

पेपर्स की प्रिंटिंग 
– सीबीएसई ने इसके लिए केंद्रीय स्तर पर एक प्रिटिंग एजेंसी की सेवाएं ली हैं. जहां से सभी विषयों के पेपर छपवाए जाते हैं. ये सीबीएसई अफसरों की कड़ी निगरानी में होता है. इसके हर चरण पर उनकी निगाह होती है. यानि पेपर को छापे जाने से लेकर उसे सीलबंद करके पैकेज बनाए जाने तक.

इसे भी पढ़ें-  LIVE Rohini Court Firing News: दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में जज के सामने गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ गोगी की हत्या, दो हमलावर ढेर

yashbharat

क्या है पेपर्स का डिस्ट्रीब्यूशन तंत्र
– एग्जाम पेपर प्रिंट होने के बाद सीबीएसई की निगरानी में ही उसके हेडक्ववार्टर पहुंचते हैं और फिर उन्हें रीजनल आफिसों को भेज दिया जाता है.

आगे की प्रक्रिया क्या है
1. हर शहर में पांच-छह समीपवर्ती स्कूलों का एक क्लस्टर बनाकर एक किमी के दायरे में स्थित करीबी बैंक को कस्टोडियन बनाया जाता है.
2. इसी बैंक में सीबीएसई पेपर्स के बंडल पहुंचाता है
3. किसी भी सब्जेक्ट के पेपर एग्जाम से करीब दस दिन पहले कस्टोडियन बैंक तक पहुंच जाते हैं

एग्जाम से एक दिन पहले क्या होता है
1. कस्टोडियन बैंक क्लस्टर स्कूलों के एग्जाम सुपरिटेंडेंट को बुलाता है
2. बैंक मैनेजर और एग्जाम सुपरिटेंडेंट के सामने उस सब्जेक्ट का बड़ा बंडल खुलता है. उसमें सभी पेपर सेट्स के सीलबंद छोटे-छोटे पैकेट होते हैं
3. इन्हेंं हर स्कूल में एग्जाम दे रहे परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से बांट लिया जाता है
4. अगले दिन इसी क्रम में हर एग्जाम सेंटर को पेपर सेट्स के पैकेट दिए जाते हैं.

yashbharat

एग्जाम के दिन की प्रक्रिया
– बैंक की प्रक्रिया एग्जाम के समय से ठीक 45 मिनट पहले शुरू होती है. अगर एग्जाम सुबह 10.30 बजे शुरू होना है तो प्रक्रिया इस तरह होगी
सुबह 09.45 – बैंक से एग्जाम सेंटर को पेपर सीलबंद सेट दे दिए जाते हैं
09.50 बजे – एग्जाम पेपर्स के सेट स्कूल जाने चाहिए
09.52 बजे – चार टीचर्स और एक सीनियर स्टूडेंट की निगरानी में पेपर्स के सेट खोले जाते हैं
10.00 बजे – सीबीएसई के रीजनल आब्जर्बर को पेपर खोलने की प्रक्रिया की फोटो भेजी जाती है ताकि सुनिश्चित हो सके कि सबकुछ ठीक तरीके से हुआ
10.15 बजे – परीक्षार्थियों को पेपर बांटने का काम शुरू जाता है. 15 मिनट परीक्षार्थी इसे पढ़ते और समझते हैं.
10.30 बजे – पेपर के आधार पर परीक्षार्थी उत्तर पुस्तिकाओं पर लिखना शुरू करते हैं

इसे भी पढ़ें-  Bihar Crime: प्रेमी संग मिलकर पत्नी ने पति के किये तीन टुकड़े, सबूत मिटाने के लिए शव को ड्रम में रख लगा दी आग

कहां से लीक हो सकते हैं पेपर
सीबीएसई के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार केवल दो ही स्थान ऐसे हैं, जहां से पेपर लीक हो सकते हैं
1. पेपर लीक का पहला प्वाइंट
-जिस जगह पेपर छप रहे हैं. वहां से इसके लीक होने की आशंका जाहिर की गई है. ऐसा प्रिटिंग एजेंसी और कोचिंग सेंटर्स की मिलीभगत से हो सकता है. इसी सिलसिले में दिल्ली के राजेंद्रनगर में एक बड़े कोचिंग सेंटर संचालक संदेह के घेरे में आया है. कोचिंग सेंटर्स की दिलचस्पी पेपर लीक कराने में क्यों होती है. इसकी अपनी वजहें हैं. जिसका जिक्र हम आगे करेंगे.

2. पेपर लीक का दूसरा प्वाइंट
– स्कूल में पेपर पहुंचने के बाद वहां से भी पेपर लीक हो सकते हैं. हालांकि स्कूलों में पेपर के सीलबंद पैकेट खोलने की प्रक्रिया काफी सुरक्षित है लेकिन इसमें भी दरारें हैं.

इसे भी पढ़ें-  PAK Biryani bill: NZ टीम की सुरक्षा में तैनात जवान खा गए 27 लाख की बिरयानी, कौन चुकाएगा बिल

कोचिंग सेंटर्स का खेल
कोचिंग देश में एक बड़ी इंडस्ट्री के रूप में तब्दील हो चुकी है. आमतौर बड़े कोचिंग सेंटर में इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए तैयारी करने वाले बच्चों को आश्वस्त किया जाता है कि सीबीएसई एग्जाम में भी बेहतर नंबर दिलाने का जिम्मा उनका है. कोचिंग सेंटर्स पर पढाई से सीबीएसई या अन्य बोर्डों के एग्जाम में नंबर लेने में दिक्कत नहीं आएगी.

    • अब सारे ही बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट ऐसे दावे करते हैं और अपने यहां बच्चों की इसी तरह तैयारी कराते हैं कि वो स्कूल और कंपटीशन दोनों के लिए तैयार हो सके.
    • तकरीबन सारे बड़े कोचिंग सेंटर्स का या तो स्कूलों से अनुबंध रहता है या उन्होंने अपने ही स्कूल खोल दिए हैं, जहां वो अपने यहां कोचिंग लेने वाले बच्चों का दाखिला कराते हैं.
  • जिस कोचिंग इंस्टीट्यूट के बच्चे बोर्ड एग्जाम और कंपटीशन दोनों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उसका नाम उतना ही चमकता है और नाम चमकने का मतलब है बिजनेस का बड़े तौर पर बढ़ जाना.
Advertisements