कर्नाटक चुनाव का बजा बिगुल: लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा है बड़ा दांव, ये चार मुद्दे भी रहेंगे हावी

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नई दिल्‍ली। कर्नाटक में विधान सभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। इसके साथ ही राज्य में आदर्श चुनावी आचारसंहिता भी लागू हो गई है लेकिन कांग्रेस ने इससे पहले ही मास्टरस्ट्रोक जड़ दिया है।

राज्य की करीब 21 फीसदी आबादी वाले लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देकर कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने केंद्र की बीजेपी सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। कांग्रेस को इस राजनीतिक बाजी का न सिर्फ हाल के चुनावों में फायदा हो सकता है बल्कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में भी पार्टी इस मुद्दे को बीजेपी के खिलाफ भुना सकती है। बता दें कि 224 सदस्यों वाले कर्नाटक विधानसभा की करीब 100 सीटें ऐसी हैं, जहां लिंगायत समुदाय का प्रभाव है।

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कांग्रेस के इस कदम से बीजेपी में बेचैनी है क्योंकि माना जाता रहा है कि लिंगायत समुदाय बीजेपी का कोर वोटर है लेकिन धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देकर कांग्रेस ने बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। इस मुहिम के बाद लिंगायत समुदाय में कांग्रेस के प्रति नरमी भी बढ़ गई है। लिहाजा, हो सकता है कि इस समुदाय को कुछ वोट झटकने में कांग्रेस सफल हो जाए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी गंभीरता को भांपते हुए ही सोमवार को सिद्धगंगा मठ पहुंचकर श्री श्री शिवकुमारा स्वामीजी का आशीर्वाद लिया। दलितों से जुड़े मठों में भी अमित शाह के जाने का कार्यक्रम है। दलित पारंपरिक रूप से कांग्रेस के वोट बैंक रहे हैं। इसलिए अमित शाह कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं। लिंगायत के अलावा निम्न सियासी मुद्दे भी कर्नाटक चुनाव में अहम रोल अदा कर सकते हैं।

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