बड़ा प्रश्न, भाजपा बचा पाएगी इन उप चुनावों के बाद बहुमत?

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राजनीतिक डेस्क। पांच लोकसभा सीटें 2019 से पहले उप चुनाव के लिए तैयार हैं. इनमें तीन बीजेपी के और दो उसके सहयोगियों के पास थीं. चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि उप चुनाव में बीजेपी के खराब प्रदर्शन का सिलसिला आगे भी कायम रहा तो उसे सहयोगियों के सहारे सरकार चलाने पर मजबूर होना पड़ सकता है.

गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव के बाद बीजेपी 273 सीटों पर सिमट गई है. यह संख्या लोकसभा अध्यक्ष को छोड़कर है. 545 सदस्यों वाले सदन में दो सदस्य नॉमिनेट होते हैं, जिन्हें वोट का अधिकार नहीं होता. ऐसे में 543 के हिसाब से उसके पास बहुमत है. लेकिन अगर भविष्य में होने वाले उप चुनाव की सीटें वह हारती है तो समीकरण बदल जाएंगे.

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उपचुनावों के आंकड़ों पर निगाह डालें तो चार साल में बीजेपी सिर्फ चार सीट पर ही उप चुनाव जीत पाई है जबकि 8 सीटों पर हार गई है. 2014 में उसके 282 सांसद थे.

अब जिन सीटों पर उप चुनाव होने हैं उनमें अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर), भंडारा गोंदिया, पालघर (महाराष्ट्र), कैराना (यूपी) और नगालैंड शामिल हैं.
अनंतनाग सीट 4 अप्रैल 2016 से पीडीपी सांसद महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे से खाली हुई थी. वह मुख्यमंत्री बन गई थीं. नगालैंड सीट बीजेपी की सहयोगी पार्टी नगा पीपल फ्रंट के नेता नेफ्यू रियो के सीएम बनने के बाद 22 फरवरी से खाली है.
भंडारा गोंदिया, पालघर (महाराष्ट्र), कैराना (यूपी) बीजेपी की सीटें हैं. भंडारा गोंदिया सीट 8 दिसंबर 2017 को नाना भाऊ पटोले के त्यागपत्र से खाली हुई थी. पालघर (महाराष्ट्र) की सीट 30 जनवरी 2018 को चिंतामन वंगा की मृत्यु और कैराना (यूपी) की सीट हुकुम सिंह के देहांत के बाद खाली हुई है.

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बीजेपी और शिवसेना के रिश्तों की परीक्षा

दो सीटें महाराष्ट्र की हैं. शिवसेना पहले ही एलान कर चुकी है कि वह 2019 का आम चुनाव बीजेपी के साथ नहीं लड़ेगी. इसलिए उप चुनाव चुनाव में दोनों पार्टियों के रिश्तों की परीक्षा होगी. साथ ही कैराना में सपा-बसपा के सियासी मेलजोल का एक बार फिर टेस्ट होगा.

अनंतनाग में क्यों लटका है उप चुनाव

जानकारी के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में सीट खाली होने के 6 माह के अंदर चुनाव करवाने का प्रावधान है. लेकिन विशेष हालात में सरकार के अनुरोध पर चुनाव आयोग इसे आगे बढ़ा सकता है. जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट पर ऐसा ही हो रहा है. यह सीट अप्रैल 2016 से महबूबा मुफ्ती के सीएम बनने के बाद से खाली है.

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दो बार इस पर उप चुनाव रद्द हो चुका है. मई 2017 में राजनीतिक दलों की ओर से इसे टालने की अपील की गई थी. पहले यहां 12 अप्रैल को चुनाव होने वाला था, लेकिन नौ अप्रैल को श्रीनगर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारी हिंसा और बहुत कम मतदान के बाद से इसे टाल दिया गया था. इस संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक हिंसा वाले अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां और कुलगाम आते हैं.

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