पहली बार राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी BJP

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। पार्टी के 38 वर्ष के इतिहास में पहली बार सदन में उसके 69 सदस्य हो गए हैं। भाजपा का गठन 1980 में हुआ था। हालांकि भाजपा की अगुआई वाला राजग अभी भी 245 सदस्यीय उच्च सदन में बहुमत से दूर ही रहेगा। सदन में बहुमत के लिए 126 का आंकड़ा चाहिए। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्र्रेस के कुल सदस्य 50 हो जाएंगे।

शुक्रवार को सात राज्यों में राज्यसभा की 26 सीटों के लिए हुए मतदान में भाजपा को सर्वाधिक 12 सीटों पर विजय हासिल हुई। कांग्रेस को पांच, तृणमूल कांग्रेस को चार, जदयू (शरद गुट) को एक और तेलंगाना राष्ट्र समिति को तीन सीटें मिलीं।

गौरतलब है कि इस वर्ष 17 राज्यों से राज्यसभा की 59 सीटें रिक्त हुई थीं। इनमें से 10 राज्यों में 33 प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें भाजपा के 16 थे। इस प्रकार कुल 59 रिक्त सीटों में से भाजपा को 28 मिलीं। कांग्रेस को दस, बीजद को तीन, तेदेपा, राजद और जदयू को दो-दो और वाइएसआर कांग्रेस, राकांपा एवं शिवसेना को एक-एक सीट हासिल हुई।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों के लिए शुक्रवार को हुए चुनाव में भाजपा ने नौ जीत ली। आठ सीटें उसे प्रथम वरीयता के मतों की गिनती में ही हासिल हो गईं जबकि नौवीं पर दूसरी वरीयता के मतों से जीत मिली। सपा की जया बच्चन भी प्रथम वरीयता में ही चुनाव जीत गईं।

प्रथम वरीयता के वोटों से जीतने वालों में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, अशोक वाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव व हरनाथ सिंह यादव हैं। इससे पहले पार्टी के नौवें प्रत्याशी अनिल अग्रवाल और बसपा के उम्मीदवार डॉ. भीमराव अंबेडकर में कांटे का मुकाबला रहा।

दूसरी वरीयता के मतों की गणना के बाद उन्हें विजयी घोषित किया गया। इससे पहले मतगणना शुरू होने में विलंब हुआ क्योंकि सपा-बसपा ने दो विधायकों के मतों को लेकर चुनाव आयोग में आपत्ति दाखिल की थी। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आयोग ने उन आपत्तियों को खारिज कर दिया। चुनाव में भाजपा और बसपा के एक-एक वोट अवैध भी घोषित हुए।

बंगाल की पांच में से चार तृणमूल को

बंगाल की पांच राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में से चार पर तृणमूल व पांचवीं सीट पर कांग्र्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी विजयी हुए। भाजपा के तीन व गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) के दो विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

छत्तीसगढ़ में 49 विधायकों वाली भाजपा को मिले 51 मत

छत्तीसगढ़ में 49 विधायकों वाली भाजपा को 51 मत मिले। भाजपा की सरोज पांडेय 15 वोट से जीत गईं। कांग्रेस के लेखराम साहू को 36 मत मिले। यहां सिर्फ एक सीट पर चुनाव होना था। कांग्रेस से निष्कासित विधायक अमित जोगी ने कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया द्वारा पिता अजीत जोगी को जयचंद कहने पर नाराजगी जताते हुए मतदान नहीं किया। जोगी के करीबी दो कांग्रेसी विधायक आरके राय और सियाराम कौशिक ने भी मतदान का बहिष्कार किया।

झारखंड में भाजपा-कांग्रेस को एक-एक

यहां राज्यसभा की दो रिक्त सीटों में से भाजपा के समीर उरांव व कांग्रेस के धीरज साहू ने जीत दर्ज कर ली। भाजपा ने दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारा था।

केरल में जदयू (शरद गुट) के वीरेंद्र कुमार फिर जीते

केरल में एक सीट के लिए हुए चुनाव में एलडीएफ समर्थित जदयू (शरद गुट) के एमपी वीरेंद्र कुमार ने यूडीएफ (विपक्ष) के बी बाबू को पराजित किया। 140 सदस्यीय सदन में वीरेंद्र कुमार को 89 और बाबू को 40 वोट मिले। वीरेंद्र कुमार ने नीतीश कुमार द्वारा बिहार में भाजपा से हाथ मिलाने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।