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चुनाव सिर पर और कांग्रेस में गुटबाजी के चलते अभी तक सांगठनिक चुनाव नहीं

भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव सिर पर हैं. प्रदेश कांग्रेस में आपसी गुटबाज़ी नासूर बन चुकी है. लेकिन ऐसे और भी कई मोर्चे हैं जहां कांग्रेस को जंग जीतनी ज़रुरी है. दरअसल चुनावों में काम करने में सबसे ज़रुरी रोल युवा मोर्चे का होता है लेकिन युवा मोर्चे और एनएसयूआई के रिक्त पदो पर आंतरिक चुनाव नहीं हो पा रहे.

मध्यप्रदेश में चुनाव सिर पर हैं. प्रदेश कांग्रेस में आपसी गुटबाज़ी नासूर बन चुकी है. लेकिन ऐसे और भी कई मोर्चे हैं जहां कांग्रेस को जंग जीतनी ज़रुरी है. दरअसल चुनावों में काम करने में सबसे ज़रुरी रोल युवा मोर्चे का होता है लेकिन युवा मोर्चे और एनएसयूआई के रिक्त पदो पर आंतरिक चुनाव नहीं हो पा रहे. ऐसे में सवाल ये उठता है कि जीत का दावा ठोकने वाली कांग्रेस बुनियादी काम कब शुरु करेगी.

प्रदेश में कांग्रेस आपसी गुटबाज़ी से जूझ रही है ये समस्या अब पुरानी हो चुकी है. अब प्रदेश कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी मुश्किल टीम खड़ी करने की है. यह और बात है कि कांग्रेस युवा मोर्चे की सदस्यों की संख्या बढ़ रही है लेकिन उनकी ज़िम्मेदारी तय होने में वक्त लगेगा. क्योंकि चुनावों में वक्त कम है और पार्टी के अंदर चुनाव की प्रक्रिया लंबित हो रही है. हालांकि कांग्रेस ये मानती है कि इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता. प्रदेश में कांग्रेस जमीन तलाश रही है. लेकिन काम करने वालों को तरजीह अगर वक्त पर नहीं मिली तो अंजाम  शायद वह ही पुराना होगा.

वहीं बीजेपी नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी एक अनुशासित पार्टी है जो सारे काम वक्त से पहले पूरे करती है. बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस की खिल्ली उड़ाने वाले अंदाज में कि राष्ट्रीय नेतृत्व जैसा होगा, निचले स्तर पर वैसा ही काम होगा. कि राहुल गांधी खुद वरिष्ठों की कतार में आ गए हैं लेकिन खुद को युवा नेता बताते हैं. उनका संगठन कंफ्यूज़ है कि युवाओं को मेन स्ट्रीम में जगह दी जाए या युवा मोर्चे मे ।

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