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राज्यसभा चुनाव: यूपी में रोचक मुकाबला, जानिये मप्र सहित अन्य राज्यों का गणित

राजनीतिक डेस्क।


शुक्रवार को राज्यसभा के 58 नए सदस्यों का चुनाव होना है। हालांकि यूपी को छोड़कर शेष 15 राज्यों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन तय है, केवल औपचारिक घोषणा ही करनी है। यूपी में निर्धारित इस चुनाव से आगामी लोकसभा निर्वाचन के लिये सूबे की दो बड़ी सियासी ताकतों सपा और बसपा के गठबंधन की संभावनों का भी निर्णय होगा। राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक करीब 25 साल के बाद ऐसा पहला मौका है जब बसपा प्रमुख मायावती ने सपा के प्रति नरम रुख अपनाया है। यह आगे भी जारी रहेगा, इसका सारा दारोमदार राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर है।

यूपी में राज्यसभा के उम्मीदवार
उप्र से राज्यसभा की 10 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने नौ प्रत्याशी उतारे है इनमें अरूण जेटली, डॉ.अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, जीवीएल न​रसिंहा राव, हरनाथ सिंह यादव तथा अनिल कुमार अग्रवाल हैं। जबकि सपा ने जया बच्चन और बसपा ने भीमराव आंबेडकर को मैदान में उतारा है। मालूम हो कि सपा के राज्यसभा सदस्यों नरेश अग्रवाल, दर्शन सिंह यादव, नरेश चन्द्र अग्रवाल, जया बच्चन, चौधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी, भाजपा के विनय कटियार और कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके अलावा मनोहर पर्रिकर और मायावती की सीट रिक्त है।

केवल यूपी में है मजेदार मुकाबला
राज्यसभा चुनाव को केवल यूपी के सियासी समीकरण के ही दिलचस्प बनाया हुआ है। शुक्रवार को होने वाले चुनाव यूपी में बीजेपी और सपा-बसपा के बीच केवल 1 सीट को लेकर प्रतिष्ठा की लड़ाई है। इस एक सीट पर वोटों के समीकरण कुछ इस तरह है कि बीजेपी, सपा-बसपा इसे जीतने के लिए शाम—दाम—दंड—भेद का दांव लगाने से गुरेज नहींं कर रहे हैं।

यह है यूपी का गणित
राज्यसभा की इन 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी की 8 सीट तो तय है। वहीं सपा की नौंवीं सीट भी पक्की है। अब जो 10वीं सीट है, पूरा महाभारत केवल इसी एक सीट के लिए है। यहां बीजेपी के अनिल अग्रवाल और बसपा के भीमराव अंबेडकर में खिताबी मुकाबला है। 10वीं सीट के लिए बसपा की ओर से भीमराव अंबेडकर को सपा का समर्थन प्राप्त है। एक राज्‍यसभा सीट पर जीत के लिए औसत 37 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। इस लिहाज से देखा जाए तो यूपी की आठ सीटों पर वोट करने के बाद बीजेपी के पास 8 विधायकों के अतिरिक्त मत बच रहे हैं और उसे जीत के लिए सिर्फ नौ और मतों की जरूरत होगी। अभी बीजेपी के पास 8 विधायक हैं और उसे जीत के लिए 9 और चाहिए। वहीं बसपा के पास 19 विधायक हैं, और बसपा के 19, सपा के 10, कांग्रेस के 7 और रालोद के 1 वोट को मिलाकर कुल 37 हो रहे हैं। बसपा को अगर ये सभी वोट कर देते हैं तो लगभग यह जीत के बराबर होगा, मगर बीजेपी इनमें से तोड़ने में कामयाब हो जाती है, तो फिर यह असंभव हो जाएगा। तो इस लिहाज से देखा जाए तो यूपी में 10 सीटों में से बीजेपी को 8 सपा को 1 सीट पर जीत तय है। महामुकाबला बस 10वीं सीट के लिए ही है।

बिहार
जेडीयू के अनिल कुमार साहनी, वशिष्ठ नारायण सिंह और महेंद्र प्रसाद, बीजेपी के धमेंद्र प्रधान, रविशंकर प्रसाद का कार्यकाल 2 अप्रैल 2018 को पूरा होने और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर जेडीयू के अली अनवर की सदस्यता खत्म किए जाने से बिहार से राज्यसभा की 6 सीटें खाली हुई थीं। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में फिलहाल आरजेडी के 79, जेडीयू के 69, बीजेपी के 52, कांग्रेस के 27, भाकपा माले के 3, एलजेपी और RLSP के 2-2, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा सेक्युलर के 1 और 4 निर्दलीय विधायक हैं।

आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों के लिए सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी के 2 उम्मीदवारों और विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के 1 उम्मीदवार को आम सहमति से चुन लिया गया। टीडीपी के सीएम रमेश, कनकमेदला रवींद्र कुमार और वाईएसआर कांग्रेस के वेमिरेड्डी प्रभाकर रेड्डी को आंध्र प्रदेश की उन 3 सीटों पर चुना गया है। सीएम रमेश दूसरी बार तो वहीं कुमार और रेड्डी पहली बार राज्यसभा सदस्य के तौर पर शामिल होंगे। राज्यसभा में 6 सीटों पर टीडीपी के सदस्यों का कब्जा बरकरार है, लेकिन इस चुनाव के साथ ही वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों की संख्या अब एक से दो हो गई है।

हरियाणा
हरियाणा में राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए बीजेपी उम्मीदवार रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स (67) निर्विरोध लिए गए हैं। कारण यह है कि किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन ही नहीं भरा है। कांग्रेस सदस्य शादी लाल बत्रा 2 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं। हरियाणा में 90 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 47 विधायक हैं और वत्स की जीता पहले ही आसान मान जा रही थी। INLD के 19 सदस्य, कांग्रेस के 17 और बीएसपी और शिरोमणि अकाली दल के एक-एक सदस्य हैं। 5 निर्दलीय भी हैं। हरियाणा से बीजेपी के राज्यसभा सदस्यों की संख्या अब 2 हो गयी है। केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह राज्य से राज्यसभा के दूसरे सदस्य हैं।

मध्य प्रदेश
केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान सहित बीजेपी के 4 उम्मीदवार और कांग्रेस के राजमणि पटेल राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किये गये। मध्य प्रदेश से निर्विरोध निर्वाचित होने वालों में केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत, मीसाबंदी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, वरिष्ठ बीजेपी नेता अजय प्रताप सिंह और कांग्रेस के राजमणि पटेल शामिल हैं। गहलोत मध्य प्रदेश से लगातार दूसरी बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि प्रधान पहली बार मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजे गये हैं। इससे पहले वो बिहार से राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। अजय प्रताप सिंह प्रदेश के विन्ध्य क्षेत्र के और कैलाश सोनी प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र के रहने वाले हैं। कांग्रेस नेता राजमणि पटेल भी विन्ध्य क्षेत्र के साथ ही ओबीसी भी हैं। इस इलाके में करीब 45 प्रतिशत मतदाता ओबीसी हैं। पटेल को राज्यसभा भेजने का सीधा मतलब यह है कि कांग्रेस की नजर ओबीसी वोटों पर है। मध्य प्रदेश में कुल 11 राज्यसभा सीटें हैं, इनमें से 8 सीटों पर बीजेपी के प्रतिनिधि हैं और 3 कांग्रेस के पास हैं।

ओडिशा
ओडिशा से राज्यसभा चुनावों के लिए बीजू जनता दल के 3 उम्मीदवारों प्रशांत नंदा, सौम्य रंजन पटनायक और अच्युत सामंत को राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। एकमात्र निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष महापात्र की ओर से दाखिल किए गए नामांकन पत्र को अमान्य करार दे दिया गया क्योंकि वो प्रस्तावक विधायकों की जरूरी संख्या जुटाने में नाकाम रहे थे। विपक्षी पार्टियों- कांग्रेस और बीजेपी ने राज्य विधानसभा में अपनी अपर्याप्त संख्या के कारण अपने किसी उम्मीदवार को नहीं उतारा। कुल 147 सदस्यों वाली ओड‍िशा विधानसभा में बीजेडी के 118 विधायक हैं। कांग्रेस के 15 जबकि बीजेपी के 10 विधायक हैं। बीजद के सांसद दिलीप तिर्की, एयू सिंहदेव और बीजेडी समर्थित निर्दलीय सदस्य एवी स्वामी का कार्यकाल 2 अप्रैल को पूरा होने जा रहा है, इसलिए राज्य से राज्यसभा की 3 सीटों पर चुनाव कराए जा रहे हैं।

गुजरात
गुजरात से राज्यसभा के लिए 4 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें 2 बीजेपी और 2 कांग्रेस के हैं। केंद्रीय मंत्रियों पुरुषोत्तम रूपाला और मनसुख मांडविया( बीजेपी) और नारण राठवा और अमी याज्ञनिक (कांग्रेस) को चुनाव अधिकारियों ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। बीजेपी के किरीटसिंह राणा और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार पीके वलेरा ने अपना नाम वापस ले लिया। राज्य से राज्यसभा की 4 सीटें खाली थीं।

उत्तराखंड
उत्तराखंड से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए बीजेपी प्रत्याशी अनिल बलूनी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इस सीट के लिए नामांकन सिर्फ बलूनी ने भरा था। राज्यसभा की ये सीट अभी तक कांग्रेस के पास थी। सत्ताधारी बीजेपी के विधानसभा में बहुमत को देखते हुए कांग्रेस ने राज्यसभा सीट के लिए अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। 70 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 56 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 11 विधायक हैं और 2 सीटें निर्दलीय के पास है। हाल ही में थराली से बीजेपी विधायक मगनलाल शाह के निधन के कारण एक सीट खाली है।

राजस्थान
राजस्थान से राज्यसभा की 3 सीटों पर बीजेपी के डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, भूपेन्द्र यादव और मदन लाल सैनी निर्विरोध चुन लिये गये। 2008 में बीजेपी से अलग हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पिछले सप्ताह एनपीपी के दो अन्य विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हुए। मीणा के अलावा बीजेपी के राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव और वरिष्ठ नेता मदन लाल सैनी राज्यसभा सीट के लिये नामांकन पत्र दाखिल किया था। विपक्ष कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों के लिये किसी भी उम्मीदवार को नहीं उतारने की घोषणा की थी। बीजेपी के तीनों उम्मीदवारों के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार ने अपना नामांकन दाखिल नहीं किया था। बीजेपी सांसद भूपेन्द्र यादव और दो कांग्रेस सासंद अभिषेक मनु सिंघवी ओर नरेन्द्र बुढानिया का कार्यकाल 3 अप्रैल को पूरा हो रहा है।

महाराष्ट्र
राज्यसभा चुनावों में महाराष्ट्र से केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर सहित 6 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया। महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर की ओर से अपना नामांकन पत्र वापस लेने के बाद बचे 6 उम्मीदवारों का चुनाव अब महज औपचारिकता ही है। राज्यसभा की खाली हुई 6 सीटों के लिए बीजेपी से 3 उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के एक-एक उम्मीदवार हैं। बीजेपी उम्मीदवारों में प्रकाश जावड़ेकर, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे और पार्टी की केरल इकाई के पूर्व अध्यक्ष वी मुरलीधरन शामिल हैं। कांग्रेस ने वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर, शिवसेना ने अनिल देसाई और एनसीपी ने वंदना चव्हाण को उम्मीदवार बनाया है।

केरल की एक सीट के लिए उपचुनाव भी 23 मार्च को होगा, क्योंकि एम.पी. वीरेंद्र कुमार ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

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