18 घंटे में बदल गई जिंदगी, युवाओं ने शरीर से हटाए 15 किलो कपड़े
सुसारी । किसी ने कहा है कि अच्छे तो सब हैं, बस नजरिए की बात है। शायद इसी वाक्य को ध्यान में रखते हुए नवादपुरा के युवाओं ने एक विक्षिप्त का हुलिया क्या बदला, उसकी मानसिक हालत में भी सुधार होने लगा। युवाओं ने बताया कि विक्षिप्त को समझाना आसान नहीं था। प्रेम से समझा-बुझाकर इसके लिए राजी किया। इसके लिए युवाओं को करीब 18 घंटे की मेहनत करना पड़ी। अब उसकी जिंदगी बदलने की शुरुआत हो गई है। युवाओं ने उसका नाम दरबार रखा है।
सड़क किनारे मिला था बदहाल हालत
निसरपुर-कोणदा मार्ग पर रविवार को तन पर कपड़े बांधकर विक्षिप्त बैठा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे नवादपुरा के पटेल कमल पटेल, महेंद्र सेंचा व मनोज लछेटा की नजर उस पर पड़ी। वे उसके पास गए और बातचीत शुरू की। उसकी समझ में सब आ रहा था, लेकिन वह किसी बात का उत्तर नहीं दे रहा था। नाम, पते को लेकर भी उसने कोई जानकारी नहीं दी।
समझा-बुझाकर वाहन में बैठाया
दरबार से कुछ देर बात करने के बाद सभी लोग वहां से ग्राम नवादपुरा पहुंचे। जहां से कुछ युवा साथियों को इस बारे में बताया। यहां से सभी लोग एक बार फिर निसरपुर-कोणदा मार्ग पहुंचे और दरबार को प्रेम से समझा-बुझाकर वाहन में बैठाकर नवादपुरा लाया गया।
खाट पर बैठाकर कपड़े निकाले
दरबार के नवादपुरा पहुंचने पर लालू गेहलोत, बद्री मेहता, गणेश पंवार, डॉ. राकेश पाटीदार, सचिन सेंचा आदि ने उसके तन पर बंधे कपड़े निकाले, जो लगभग 15 किलो होंगे। काफी मेहनत के बाद ये कपड़े निकाले जा सके।
दाढ़ी-कटिंग बनवाकर नहलाया, भोजन कराया
बाद में उसकी दाढ़ी और कटिंग बनवाकर नहलाया गया। इसमें ग्राम के युवा गोलू सोलंकी, विकास गेहलोत व संजू सेन ने सहयोग किया। रात में उसे भोजन करवाया गया। गांव के पटेल के विश्राम गृह में उसको आश्रय दिया गया है।
.. और जिंदगी बदलने की हुई शुरुआत
सुबह सांवरिया मंदिर प्रांगण में जब पौधों को पानी दिया जा रहा था, तो दरबार भी वहां पहुंच गया। कुछ देर वहां ग्रामीणों को पौधों को पानी देते देखते रहा। इसके बाद एक व्यक्ति के हाथों से पाइप लेकर लगभग एक घंटे तक पौधों को पानी देता रहा। कमल पटेल ने बताया कि अभी वह ज्यादा बातचीत नहीं कर रहा है। उसे किसी मनोचिकित्सक के पास ले जाकर इलाज करवाएंगे।
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