70 वर्ष पुरानी मांग पूरी, सिंधी समाज के लिए आज का दिन अविस्मरणीय और अकल्पनीय

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कटनी। शरणार्थी के रूप में वर्षोे से माधवनगर की पुनर्वास भूमि पर काबिज सिंधी समाज के हजारों नागरिकों के लिए आज का दिन अविस्मरणीय एवं अकल्पनीय रहा। प्रदेश शासन के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने राज्यमंत्री संजय सत्येन्द्र पाठक के अनुरोध पर गंभीरता से इस विषय को लेकर विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक देने के निर्देश प्रदान किए। माधवनगर सिंधी समाज के नागरिकों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं राज्यमंत्री श्री पाठक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। यह मामला पूरे सिंधी समाज की भावनाओं से जुड़ा हुआ था। राज्यमंत्री संजय पाठक ने इसके लिए जो प्रयास किए हैं उसे हम सदैव याद रखेंगे। यह प्रयास अभिनंदनीय है। समाज इसके लिए मुख्यमंत्री एवं राज्यमंत्री का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने आज के दिन को इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराने में अहम भूमिका निभाई।

पुर्नवास के लिए राजस्व विभाग द्वारा ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया

पश्चिमी पाकिस्तान से आये सिंधी विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक देने के प्रस्ताव का अनुमोदन आज राजधानी भोपाल में हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में कर दिया गया। माधवनगर के सिंधी विस्थापितों के पुर्नवास के लिए राजस्व विभाग द्वारा ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया गया है, जिसे कार्यवाही के लिए कलेक्टर के पास भेजा जाएगा।

एक दो दिन में ही सारी प्रक्रिया पूर्ण कराकर संभवतः मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चेट्रीचंड्र और गुड़ीपड़वा के शुभ मौके पर सिंधी भाईयों को जमीन के मालिकाना हक की सौगात दे देंगे। सिंधी समाज के लिए उनके जीवन का अब तक यह सबसे बड़ा और अहम फैसला होगा, जिसके लिए प्रदेश शासन के राज्यमंत्री संजय सत्येन्द्र पाठक ने शासन स्तर पर पिछले दो सालों में अनवरत प्रयास किए। उनका मध्यप्रदेश सरकार की केबिनेट में होना सिंधी समाज के लिए शुभ रहा।

गौरतलब है कि विभाजन के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से आये सिंधी विस्थापित तात्कालिक रूप से कटनी के माधवनगर में बसे थे और आजादी के बाद से ही जमीनों के मालिकाना हक (पट्टे) की मांग करते आये हैं। दशकों पहले पिछली सरकारों ने डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों को पट्टे दिए थे लेकिन इनमें से अधिकांश का नवीनीकरण नहीं हो पाया था जबकि बड़ी संख्या में और भी लोगों ने पट्टों की मांग की थी। कलेक्टर वी एस चौधरी ने यशभारत से बातचीत में कहा कि शासन से सर्कुलर मिलते ही प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 1711 विस्थापितों के पट्टों का नवीनीकरण किया जाना है। इसे ही आधार माना जाएगा, लेकिन नये सिरे से सर्वे भी होगा और पात्र पाये गये लोगों को जमीन का मालिकाना हक (पट्टे) वितरित किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने विस्थापितों को कानून बनाकर भूमि स्वामित्व के पट्टे दिये जाने का पूरा मसौदा तैयार कर लिया है, जिसका आज केबिनेट की बैठक में अनुमोदन किया गया।

इन कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था विस्थापितों को
जमीन का मालिकाना हक न मिलने से सिंधी विस्थापितों को अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। विस्थापितों को पूर्व में कन्वेयंस डीड प्रदान की गई थी किंतु इसे भू-अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया था। अब तक ऐसे भूखंडों को नजूल भूमि के रूप में अंकित किया गया था। इस वजह से विस्थापितों को जमीन पर काबिज होने के बावजूद उसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। कई विस्थापित तो ऐसे हैं जो निर्धारित पात्रता से अधिक पर काबिज है जबकि कई विस्थापितों द्वारा उन्हें दिए गए भूखंड का उपयोग आवासीय प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन में किया जाता है। इस वजह से नगरीय निकाय द्वारा उन्हें विधिवत स्वीकृतियां प्रदान नहीं की जा रहीं। इसके अलावा आवंटित भूखंड के स्थल पर भूमि उपयोग परिवर्तन भी कर लिया गया है जिसकी कोई विधिक अनुज्ञा प्राप्त नहीं की गई। कई विस्थापित तो ऐसे हैं जिनके पास रिफ्यूजी कार्ड तक उपलब्ध नहीं है और न ही उन्हें आवंटित भूखंड का कोई दस्तावेज है। ऐसे में बैंक से ऋण या अन्य कार्यवाहियों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

केबिनेट में अनुमोदित ड्राफ्ट के मुख्य बिंदु
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने मालिकाना हक देने के लिए जो नया ड्राफ्ट तैयार किया है उसके मुताबिक कनवेयंस डीड के आधार पर आवंटित भूखंड धारक को भूमि स्वामी माना जाएगा और भू-अभिलेखों में उनका नाम दर्ज भी किया जाएगा। जिन्होंने आवंटित भूखंड का स्वरूप परिवर्तित किया है उन्हें भू- राजस्व संहित 1959 की धारा 59 के आधीन प्रीमियम का भुगतान करने के बाद मान्यता मिल जाएगी। जिन्होंने आवंटित भूखंड से ज्यादा पर निर्माण कार्य कर रखा है उनके लिए भी नीति बना दी गई है जिसके मुताबिक ऐसे विस्थापितों को कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार 50 प्रतिशत राशि 5 प्रतिशत वार्षिक भू भाटक के साथ जमा करनी होगी। आवासीय प्रयोजन से भिन्न प्रयोजन तक 7.5 प्रतिशत भू-भाटक लगेगा। ऐसे भूखंडों को 30 साल की लीज पर आवंटित किया जाएगा। नीति के मुताबिक किसी कब्जाधारी ने यदि कोई भूमि परिवर्तन किया है तो योजना के मुताबिक उसे मान्य किया जाएगा। महत्वपूर्ण निर्णय यह भी हुआ है कि रिफ्यूजी कार्डधारियों के उत्तराधिकारियों को भी इन नियमों का लाभ मिलेगा। वे वैध और सम्मलित माने जाऐंगे।

3 हजार से ज्यादा परिवारों को मिलेगा लाभ
केबिनेट की बैठक में आज अनुमोदित की गई पुनर्वास योजना का लाभ कटनी माधवनगर के 3 हजार से ज्यादा सिंधी परिवारों को मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक योजना का ड्राफ्ट कलेक्टरों का इस निर्देश के साथ भेजा जा रहा है कि सर्वे का काम एक दो दिन में ही पूरा किया जाए ताकि सिंधी समाज के प्रमुख पर्व चेट्रीचंड के अवसर पर सिंधी भाईयों को प्रदेश सरकार की ओर से यह सौगात दी जा सके। इसके पहले 9 जुलाई 1986 और 18 फरवरी 1994 में हुई केबिनेट की बैठकों में इस पर चर्चा हुई थी। पूर्व में 17 से 11 विस्थापितों को मालिकाना हक के लिए पात्र माना गया था। सिंधी समाज के लोग इससे संतुष्ट नहीं थे लिहाजा मालिकाना हक की मांग इतने वर्षों में लगातार जारी रही। जिन्हें पूर्व में पट्टे आवंटित हुए उनका नवीनीकरण नहीं हो पाया था। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों ने प्रयास भी किए।

 

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