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शुरू हो गए हैं पंचक, 19 मार्च तक नहीं करें ये काम

धर्म डेस्‍क। पंचक नक्षत्रों में हानि, लाभ एवं कष्ट आदि 5 गुणा होते हैं जबकि त्रिपुष्कर में तीन गुणा और द्विपुष्कर में दोगुणा होने के संकेत हैं। प्रत्येक महीने में 5 दिनों तक पंचक रहती हैं। हमारे शास्त्रों के अनुसार इन 5 दिनों में कई कार्य करने निषेध माने गए हैं। इंदौर के गेंदेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अक्षय दुबे बताया कि 15 मार्च गुरुवार को सुबह 04.11 से पंचक का आरंभ हो गया है और यह 19 मार्च सोमवार को रात 08.09 मिनट तक रहेगा।

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नक्षत्रों के मेल से होता हैं पंचक

ज्योतिष शास्त्र में पंचक को शुभ नहीं मना जाता है। नक्षत्रों के संयोग से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है। जब कुंभ और मीन राशि पर चन्द्रमा होता है, तब पंचक लगता है। इसी तरह घनिष्ठा से रेवती तक पांच नक्षत्रों यानी घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद एवं रेवती नक्षत्र को भी पंचक कहा जाता है।

इन कार्यों को नहीं करें

इन दिनों में लकड़ी काटना, चारपाई बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना, दुकान, मकान आदि की छत्त बनवाना, चटाई आदि बुनना, बैठने वाली गद्दियों का निर्माण कराना आदि कार्य करने निषेध माने गए हैं। आमतौर पर माना जाता है कि पंचक में कुछ कार्य विशेष नहीं किए जाते हैं। इसलिए लोग पंचक में नया काम या कोई शुभ कार्य नहीं करते हैं।

इन कार्यों में नहीं होता विचार

मुहूर्त ग्रंथों में विवाह, मुंडन, गृह मुहूर्त, गृह प्रवेश, रक्षा बंधन और भैय्या दूज आदि त्योहारों में पंचक नक्षत्रों के निषेध के बारे में कोई विचार नहीं किया जाता। इन दिनों में विधिवत नक्षत्र पूजा करना, ब्राह्मणों को भोजन कराना, दान देना उत्तम कर्म है।

फिर भी जरूरी हो, तो करें ये उपाय

वैसे तो पंचक में निषेध बताए गए कार्यों को जहां तक हो सके नहीं करना चाहिए। हालांकि, यदि विशेष परिस्थितियां हो, तो कुछ उपाय करके निषेध कामों को भी किया जा सकता है।

जैसे घर में शादी होने वाली है और लकड़ी का समान खरीदना जरूरी हो, तो गायत्री हवन करवा कर फर्नीचर की खरीदारी कर सकते हैं।

अगर गृह निर्माण के दौरान पंचक पड़ जाएं, और छत डलवाने का काम टाला नहीं जा सकता हो, तो पहले मजदूरों को मिठाई खिलाएं और उसके बाद ही छत निर्माण का काम करें।

पंचक के दौरान अगर दक्षिण दिशा की यात्रा करना टाला नहीं जा सकता हो, तो हनुमान मंदिर में 5 फल चढ़ाकर यात्रा का प्रारंभ करें।

मृत्यु ऐसा अटल सत्य है, जिसे किसी भी दशा में टाला नहीं जा सकता है। यदि किसी के घर में किसी की मृत्यु पंचक के दौरान हो गई हो, तो शव दाह करने के समय पांच अलग पुतले बनाकर उन्हें अवश्य जलाएं। इसके बाद ही दाह संस्कार करें। मान्यता है कि ऐसा नहीं करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती हैं।

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