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MP: मंदिरों के विकास के लिए सरकार ने बजट में की आधी कटौती

मध्यप्रदेश में तेईस हजार से ज्यादा छोटे बड़े मंदिरों के विकास के लिए राज्य सरकार के पास बजट की कमी हो गई है. बीते साल की तुलना में सरकार ने इस बार मंदिरों के विकास पर खर्च होने वाली राशि को करीब आधा कर दिया है. सरकार के इस कदम का अब विरोध शुरु हो गया है.

मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शुमार है, जहां प्राचीन मह्तव के मंदिरों की भरमार है. राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में छोटे बड़े मंदिरों की संख्या तेईस हजार से ज्यादा है और इनमें से ज्यादातर मंदिर ऐसे हैं जहां एक दिन में सैकड़ों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

लेकिन ज्यादातर मंदिरों के हाल है ये कि यहां न तो मरम्मत के लिए राशि है और ना ही भक्तों के दर्शन मुहैया कराने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं. आलम ये है कि मंदिरों के रखरखाव के लिए ज्यादातर मंदिर पुजारी सरकार से आस बांधे हुए हैं.

सरकार भी हर साल बजट में मंदिरों के रखरखाव के लिए बजट का प्रावधान करती है लेकिन ये नाकाफी साबित होता है. इस साल सरकार ने मंदिरों के विकास के लिए आवंटित राशि का बजट पिछले साल की तुलना में करीब आधा कर दिया है. जिस पर अब बवाल उठ खड़ा हुआ है.


प्रदेश में मौजूद मंदिर और उसके लिए आवंटित बजट पर नजर डालें तो साल 2017-18 में बजट 36 करोड़ 50 लाख था साल 2018-19 के बजट में 18 करोड़ का प्रावधान है, यानि की लगभग आधा.
प्रदेश में मंदिरों की संख्या 23 हजार से ज्यादा है. पिछले साल कुल 150 मंदिरों के विकास के लिए राशि जारी हो सकी थी.

इस बार सरकार के पास पांच सौ से ज्यादा मंदिरों में निर्माण के लिए प्रस्ताव सरकार को मिले हैं. ऐसे में मंदिरों के विकास के लिए जारी होने वाली अनुदान की राशि में इस बार कटौती का असर मंदिरों पर दिखाई देगा. वहीं प्रदेश की धर्मस्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया कम बजट पर अपनी बेबसी जाहिर कर रही हैं.

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