माणिक सरकार ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

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अगरतला। त्रिपुरा के सीएम माणिक सरकार ने रविवार को अगरतला में राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही देश के सबसे गरीब और जनता के सीएम कहे जाने वाले माणिक सरकार के 20 साल के शासन का अंत हो गया।

आपको बता दें कि त्रिपुरा में पांच साल में भाजपा शून्य से शिखर तक पहुंची है और वह त्रिपुरा में अपनी सरकार बनाने के लिए तैयार है। त्रिपुरा में भाजपा के सत्ता में आने का रास्ता साफ होने के साथ ऐसे राज्यों की संख्या 20 होने जा रही है जहां भाजपा अथवा सहयोगी दलों की सरकारें हैं।

भाजपा के मुकाबले राष्ट्रीय हैसियत वाली कांग्रेस तीन-चार राज्यों तक सिमटती दिख रही है तो एक समय राष्ट्रीय राजनीति में असर रखने वाले वाम दल केवल केरल तक सिमट गए हैं। पश्चिम बंगाल के बाद उन्होंने अपने एक और गढ़ त्रिपुरा को खो दिया।

भाजपा की कुशल रणनीति का परिणाम –

भाजपा त्रिपुरा में जीत दर्ज कराने में सफल रही तो यह केवल जोरदार चुनाव प्रचार का नतीजा नहीं है। यह पूर्वोत्तर के राज्यों में विशेष ध्यान देने की उसकी रणनीति का भी परिणाम है। उसने इस रणनीति पर 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के साथ ही अमल शुरू कर दिया था। वाम दलों के मजबूत गढ़ त्रिपुरा में बाजी पलटने जा रही है, यह उसी समय स्पष्ट हो गया था जब मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने यह स्वीकार कर लिया था कि उनका मुख्य मुकाबला भाजपा से ही है।

वेतन वृद्धि भी रहा अहम मुद्दा –

भाजपा की जीत की एक मुख्य वजह भाजपा की ओर से स्थानीय कर्मचारियों के वेतन वृद्दि का मुद्दा रहा। दरअसल वाम दलों के शासन वाले त्रिपुरा राज्य में अभी तक चौथे वेतन आयोग के हिसाब से सैलरी मिलती थी, जबकि बाकी देश में सातवां आयोग लागू किए जाने की मांग की जा रही है। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया और सत्ता में आने पर वेतन वृद्धि का वादा भी किया। भाजपा ने कहा कि अगर उसकी सरकार सत्ता में आती है, तो त्रिपुरा के लोगों की देश के बाकी हिस्सों तक तरह वेतन वृद्धि की जाएगी। त्रिपुरा में पिछली बार वर्ष 2009 में वेतन वृद्धि की गई थी, उस वक्त साल 1980 के चौथे वेतन आयोग के हिसाब से वेतन दिया गया था।

भाजपा ने युवाओं पर खेला दांव –

भाजपा ने त्रिपुरा के युवा वर्ग की ओर खास ध्यान दिया, जो भाजपा की जीत में अहम रहा। दूसरी ओर वाम दल युवाओं को साधने में कामयाब नहीं रहे, जो उनकी हार की एक बड़ी वजह मानी जा सकती है। युवाओं पर ध्यान न देने की वजह से वाम दलों का कैडर कमजोर होता चला गया। वहीं भाजपा की ओर से युवाओं को भविष्य का एक विजन पेश किया गया, जिसे युवाओं ने पसंद किया।

‘सरकार’ से थी नाराजगी –

त्रिपुरा में लेफ्ट की 25 साल की ‘सरकार’ से जनता में काफी आक्रोश था, जिसे पीएम मोदी और केंद्रीय नेताओं की रैलियों ने धार दी, जिससे उनकी सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी। लेफ्ट सरकार को लेकर लोगों में नाराजगी थी। आरोप लगते रहे हैं कि सरकार ने पार्टी काडर और अपने लोगों को ही केवल फायदा पहुंचाया। बाकी सब को अलग कर दिया जाता है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कैंपेन को काफी अच्छे से आगे बढ़ाया और भाजपा की जीत को सुनिश्चित किया।

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