अपनी ब्रांड वैल्यू के लिए हर तरह का दांव खेल रहे हैं शिवराज

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मुंगावली। मध्य प्रदेश के मुंगावली और कोलारस विधानसभा के उपचुनाव में आज जो भी शिवराज सरकार के चुनाव अभियान को देख रहा है, वह हैरान है. जिस आक्रामक उंचाई पर शिवराज सरकार इस चुनाव प्रचार को लेकर गई है, चौंकाने वाली है. शिवराज ने अब तक जितने भी उपचुनाव में मैदान संभाला है, वह कभी मामा बन कर तो कभी तकलीफ में – ‘मैं हूं ना’ ये कह कर दिलों पर राज करने वाली सौम्य और सहज स्ट्रेटेजी वाले नेता दिखाई दिए हैं . लेकिन मुंगावली और कोलारस अब इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि शिवराज अब अपनी तीसरी पारी में एक आक्रामक लीडर की तरह अपनी इमेज गढ़ने में उत्सुक्त हैं.

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मोदी का प्रभाव
क्या यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रभाव है? या फिर चित्रकूट, अटेर और स्थानीय निकाय चुनावों में मिली हार के झटके का असर? भाजपा के एक वरिष्ठ नेता इससे इंकार नहीं करते. वे साफ तौर पर कहते हैं कि हां इस हार से शिवराज की ब्रांड वैल्यू कुछ कम हुई है. आज से दो साल पहले तक वे बीजेपी के लिए चुनाव जीतवाने वाले नेता थे. लेकिन अब हाल ही में हुए 6 नगर पालिका एवं 13 नगर परिषद के हुए स्थानीय निकायों के चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस बराबरी पर याने 9, 9 सीटों पर आ गई है. खास बात यह भी है कि वोट प्रतिशत के हिसाब से भी दोनों ही दलों में बराबरी का 43 प्रतिशत वोट रहा है. इसने शिवराज की चिंता को बढ़ा दिया है. वे अब अपनी उसी ब्रांड वैल्यू को फिर से साधना चाहते हैं.

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हाइकमान को संतुष्ट करने की कवायद


मुंगावली और कोलारस कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ है. यहां चुनाव जीतने का मतलब शिवराज का 2018 के विधानसभा चुनाव में और भी ज्यादा मजबूत होकर उभरना है. पार्टी संगठन से जुड़े नेता की राय है कि मध्य प्रदेश दौरे पर आए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने खुलकर कहा है कि अगला चुनाव शिवराज के नेतृत्व में ही होगा. लेकिन इसके बावजूद शिवराज की बॉडी लैग्वेज बताती है कि वे सहज और आश्वस्त नहीं है. वे अपनी क्षमता और ताकत से कई गुना ज्यादा देकर हाइकमान को संतुष्ट करना चाहते हैं.

बेटा और पूरी सरकार मैदान में
ऐसा पहली बार हुआ है जब मात्र दो विधानसभा क्षेत्रों के उप चुनाव में शिवराज सरकार ने
अपने एक दर्जन से ज्यादा मंत्रियों, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पार्टी संगठन की बड़ी फौज और एक दर्जन से ज्यादा अपने स्वयं के रोड शो किए हो. इतना ही नहीं ऐसा भी पहली बार हुआ है कि सिंधिया घराने के प्रभाव वाले क्षेत्र में दो सिंधिया अप्रत्यक्ष तौर पर आमने -सामने आए हो. कोलारस की कमान यशोधराराजे सिंधिया को देकर शिवराज ने इस अभियान को और पैना बना दिया है.

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यह इलाका सेहरिया,जाटव, यादव, लोधी धाकड कम्युनिटी का है. शिवराज के बेटे कार्तिकेय ने भी यहां अपने चुनाव अभियान से मौजूदगी दर्ज करवाई है.

खुलकर हो रहे हैं ऐलान
दिलचस्प यह है कि शिवराज सिर्फ अपनी सेना की तैनाती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मुंगावली और कोलारस जैसे पिछड़े इलाके में खुलकर सौगातों का ऐलान भी कर रहे हैं. यहां 50 हजार से ज्यादा वोट अति पिछड़े सहरिया आदिवासियों के हैं. उन्हें हर महीने एक हजार रुपए की सहायता, पुलिस तथा अन्य सरकारी विभागों में होने वाली भर्ती में रियायत, पक्के मकान जैसी घोषणाएं की गई है.

कलेक्टर को हटाया
वोटिंग से ठीक चार दिन पहले चुनाव आयोग को मुंगावली में 18 सौ फर्जी वोटर मिले हैं, जिसके चलते अशोक नगर कलेक्टर बाबूसिंह जामोद को हटा दिया है, वहीं कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया पर वोटर्स को धमकाने के आरोप में नोटिस दिया गया है. शिवराज और सिंधिया घराने की करीबी मंत्री माया सिंह भी कांग्रेस के निशाने पर है, जिसने राजनीतिक सनसनी पैदा कर दी है.

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डरे हुए नेता की तरह दिखाई दे रहे हैं
पूरी शिवराज सरकार को मुंगावली और कोलारस में देख सिंधिया इसे एक डरे हुए नेता की प्रतिक्रिया बता रहे हैं, वहीं शिवराज किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने का दांव खेल रहे हैं.

बीजेपी के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर कहते हैं कि कोई भी चुनाव छोटा नहीं होता. जिस तरह प्रधानमंत्री हर चुनाव में अपना सर्वस्व देते हैं उसी तरह मुख्यमंत्री भी मैदान संभाल रहे हैं. यह चुनाव शायद प्रदेश की 230 सीटों का भविष्य तय नहीं कर पाएगा लेकिन शिवराज को कितना फ्री हैंड मिलेगा यह इन चुनाव के नतीजों से साफ हो जाएगा.

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