भौम फाल्गुन पंचमी कल- पूजन, व्रत व उपाय से बिन मांगे मिलेगा सब कुछ

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धर्म डेस्‍क। मंगलवार दि॰ 20.02.18 को फाल्गुन शुक्ल पंचमी पर महादेव के नागेश्वर स्वरूप का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। शुभफल प्रदाता पंचमी तिथि पूर्णा संज्ञक श्रीमती कहलाती है। दक्षिण दिशा की स्वामिनी पंचमी सिद्धिदा है। शुक्ल पंचमी में शिववास कैलास व कृष्ण पंचमी में वृष पर होने से पंचमी सुखकारक व श्री-प्राप्तिकारक है। अतः इसमें शिवार्चन शुभ हैं। पंचमी शिव के नागेश्वर स्वरूप को समर्पित है। नागेश्वर का अर्थ है नागों के ईश्वर। रुद्र संहिता में इस ज्योतिर्लिंग को दारुकावने नागेशं कहा है। पौराणिक वृतांत अनुसार शिवभक्त वैश्य सुप्रिय अपने सारे कार्य शिव को अर्पित करता था, उसकी शिव भक्ति से दारुक नामक दैत्य रुष्ट होकर सुप्रिय के पूजन में विघ्न डालता था। एक दिन दारुक ने सुप्रिय को हरण कर अपने राज्य में कैद कर दिया। परंतु सुप्रिय की शिव आराधना निरंतर चलती रही। इसपर दारुक नें सुप्रिय को मृत्यु दंड दे दिया। महादेव ने सुप्रिय की रक्षा हेतु कारागार में चमकते हुए सिंहासन पर स्थित होकर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए व सुप्रिय को पाशुपतास्त्र प्रदान किया। जिससे सुप्रिय ने दारुक का अंत किया। भौम फाल्गुन पंचमी पर शिव के नागेश्वर स्वरूप के पूजन, व्रत व उपाय से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। भोग विलिसिता में वृद्धि होती है। धन की प्राप्ति होती है।

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विशेष पूजन विधि: शिवालय जाकर शिवलिंग का पंचोपचार पूजन करें। चमेली के तेल का दीपक करें, गुग्गल धूप करें, तांबे के कलश से जलाभिषेक करें, लाल कनेर के फूल चढ़ाएं, सिंदूर चढ़ाएं, लाल चंदन से त्रिपुंड बनाए, मिष्ठान का भोग लगाएं व एक माला इस विशिष्ट मंत्र जपें। पूजन के बाद भोग को पीपल के नीचे रख दें।

पूजन मंत्र: ह्रीं नागेश्वराय नमः शिवाय ह्रीं॥
पूजन मुहूर्त: प्रातः 10:00 से प्रातः 11:00 तक।

उपाय
धन की प्राप्ति हेतु शिवलिंग पर चढ़े सिंदूर से पर्स पर तिलक करें।

भोग विलिसिता में वृद्धि हेतु शिवलिंग पर चढ़ा शहद किसी सुहागिन को भेंट करें।

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समस्त सुखों की प्राप्ति हेतु शिवलिंग पर चढ़े तांबे के 7 त्रिकोण टुकड़े जलप्रवाह करें

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