ट्रंप सरकार ने क्यूबा के 15 राजनयिकों को देश छोड़ने का सुनाया फरमान

वाशिंगटन। क्यूबा और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर कड़वाहट आती दिख रही है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा के 15 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। इन्हें अमेरिका ने देश छोड़ने के लिए सात दिन की मोहलत दी है।

इस फैसले के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि हवाना के अमेरिकी दूतावास में काम कर रहे कर्मचारी सोनिक अटैक से परेशान हैं। इस वजह से कई कर्मचारियों की सुनने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। मगर इसके बाद भी क्यूबा ने इसकी जांच में मदद नहीं की। ऐसे में अमेरिका को ये कदम उठाना पड़ा।

वहीं अमेरिका ने भी शुक्रवार को हवाना के दूतावास से अपने आधा दर्जन कर्मचारियों को वापस बुला लिया है।

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रॉड्रिगेज़ ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का विरोध किया है।

ब्रूनो ने उलटे अमेरिका को ही दोषी ठहराते हुए कहा कि उसने इस रहस्यमयी बीमारी की जांच में क्यूबा को पूरी तरह सहयोग नहीं किया और अब मामले को राजनैतिक रंग दे रहा है।

आमने-सामने हुए अमेरिका और क्यूबा

सोनिक अटैक के लिए अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को क्यूबा ने सिरे से खारिज किया है। क्यूबा के विदेश मंत्री ने कहा कि इस रहस्यमय हमले में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

उलटा अमेरिका जांच में सहयोग नहीं दे रहा है। जो कर्मचारी इस हमले की वजह से बीमार हुए हैं। उनसे अमेरिका बात नहीं करने दे रहा है। न ही उनके घरों की जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

अमेरिका के इस कदम के बाद पूर्व डेमोक्रेट राष्ट्रपति बराक ओबामा की उस पॉलिसी को झटका लगा दिख रहा है। जिसके तहत कोल़्ड वॉर के बाद अमेरिका ने क्यूबा से रिश्ते ठीक करने की शुरुआत की थी।

इसी कड़ी में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा क्यूबा भी गए थे और उनके दौरे के बाद क्यूबा में अमेरिकी दूतावास दोबारा शुरू किया गया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने साफ कर दिया कि जबतक क्यूबा की सरकार हमारे राजनयिकों की सुरक्षा का भरोसा नहीं दिलाती है, तब तक हवाना के दूतावास में केवल आपात स्थिति के लिहाज से कर्मचारियों की तैनाती होगी। ताकि वहां काम कर रहे कर्मचारी सोनिक अटैक का शिकार न हों।

टिलरसन ने साफ किया कि अमेरिका क्यूबा से राजनयिक रिश्ते रखना चाहता है, वहीं सोनिक अटैक को लेकर चल रही जांच में भी पूरी मदद करने को तैयार है।

केवल राजनयिकों को ही नहीं बल्कि अमेरिका ने अपने देश के आम नागरिकों को भी क्यूबा जाने से मना किया है। ताकि वो सोनिक अटैक का शिकार न हों, सोनिक अटैक की वजह से हवाना में अमेरिकी दूतावास में काम कर रहे 22 कर्मचारियों की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। वहीं उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है।

अमेरिका ने क्यूबा के उन नागरिकों के वीजा पर भी रोक लगा दी है, जो अमेरिका घूमने आना चाह रहे हैं। वहीं अमेरिका से क्यूबा जाने वाले नागरिकों को भी केवल आपात स्थिति में ही वीजा दिया जा रहा है।

क्यूबा ने कहा कि वो इस मामले में अमेरिका का साथ चाहता है, क्योंकि कनाडा ने भी अपने राजनयिकों पर इस तरह के सोनिक अटैक की आशंका जताई है, जिसकी जांच चल रही है।

ट्रंप सरकार पर दबाव –

ट्रंप सरकार पर भी क्यूबा के खिलाफ कड़ी कार्ऱवाई को लेकर दबाव है। खासतौर पर उन रिपब्लिकन सीनेटर द्वारा जो खुद क्यूबा मूल के हैं। ऐसे ही एक रिपब्लिक सीनेटर मार्को रुबियो ने जोर दिया कि इस घटना के बाद क्यूबा के सभी राजनयिकों को देश से निकाल देना चाहिए।

वहीं उन्होंने क्यूबा के राजनयिकों को देश से निष्कासित करने के ट्रंप सरकार के फैसले का स्वागत किया।