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11-12 फरवरी को करें ये काम, कष्ट एवं परेशानियों का मिट जाएगा नामोनिशान

वेब डेस्क। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया नाम से प्रसिद्घ है। इस बार यह एकादशी 11 फरवरी को होगी। इस व्रत का पालन करने से जीव के सभी कष्ट एवं परेशानियां जहां मिट जाती हैं वहीं उसे प्रत्येक कार्य में सफलता भी प्राप्त होती है। जैसा कि इस एकादशी का नाम ही विजया है तथा यह विजय की प्रतीक है। इस व्रत में भगवान विष्णु जी का विधिवत पूजन किया जाता है। पदमपुराण के अनुसार भगवान श्रीराम जब 14 वर्ष का बनवास काटने के लिए जंगल में गए और वहां रावण ने सीता माता का हरण कर लिया तो भगवान श्री राम ने महर्षि वकदालभ्य जी के आदेशानुसार लंका पर विजय प्राप्ति की कामना से विजया एकादशी का व्रत किया और सफलता प्राप्त की।

कैसे करें व्रत- इस व्रत में वैसे तो दशमी तिथि को मिट्टी, पीतल, तांबे अथवा किसी भी धातु के कलश की स्थापना की जाती है परंतु यदि किसी कारणवश ऐसा सम्भव न हो तो व्रत करने के लिए स्नानादि क्रियाओं से निवृत होकर भी पहले जल से भरे कलश की स्थापना की जा सकती है। कलश के नीचे सात प्रकार के अनाज (सतनाजा) रखकर कलश के ऊपर जौं रखें तथा धूप, दीप, नेवैद्य, पुष्प एवं फलों सहित भगवान विष्णु जी का पूजन करें। सारा दिन उपवास रखकर फलाहार करें। अगले दिन यानि 12 फरवरी को उस कलश पर दक्षिणा रखकर किसी ब्राह्मण को वह कलश भेंट कर देना चाहिए। जिस कामना से कोई यह व्रत करता है उसे उस कार्य में पूर्ण रुप में सफलता अवश्य प्राप्त होती है। व्रत में रात्रि जागरण करते हुए अपना समय प्रभु नाम संकीर्तन में बिताने से प्रभु अत्यधिक प्रसन्न होते हैं। यह व्रत रविवार को है इसलिए सूर्यदेव को प्रात: जल चढ़ाना अति उत्तम कर्म है तथा व्रत के पारण समय में सोमवार को सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए।

क्या कहते हैं विद्वान- पण्डितों  के अनुसार भगवान को अपने भक्त अति प्रिय हैं तथा जो भक्त सच्चे मन से एकादशी व्रत करते हैं उन पर प्रभु की अपार कृपा सदा बनी रहती हैं। इस दिन मंदिर में दीपदान करने और तुलसी पूजन की भी अत्याधिक महिमा  शास्त्रों में वर्णित है। उनके अनुसार व्रत का पारण 12 फरवरी को प्रात: 10 बजे से पहले  करना चाहिए।

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