जल्द ही पैन बनेगा आपके धंधे का ‘आधार’, ऐसे हो सकती है योजना लागू

नई दिल्ली। अब सरकार जल्द ही आपके कारोबार को आसान करने की योजना पर अमल करने वाली है। इसके तहत पैनकार्ड को व्यापार का आधार बना दिया जाएगा और बिजनेसमैन को कई कार्ड रखने के झंझटों से छुटकारा मिल जाएगा।

केंद्र सरकार इस योजना पर पिछले कुछ सालों से विचार कर रही है, बजट से पहले भी इसे लेकर चर्चा हुई थी कि आज देश में बिजनेस कर रही औद्योगिक इकाईयों को धंधा शुरू करने से पहले कई तरह के रजिस्ट्रेशन कराने पड़ते हैं, ऐसे में इन्हें कई तरह के अलग-अलग यूनिक आईडी रखनी पड़ती है। ऐसे में अगर पैन कार्ड को बिजनेस का आधार बना दिया जाएगा तो अलग-अलग यूनिक आईडी के बजाए पैन कार्ड बिजनेस करने के लिए पहचान का इकलौता जरिया बन जाएगा।

नए पैन नंबर से पकड़ में आएंगी फर्जी कंपनियां-

ऐसा करने से वो कंपनियां या इकाईयां, जो टैक्स नहीं चुकाती हैं, जैसे एनजीओ, ट्रस्ट और सोसाइटीज को अलग से पैन नंबर के आवेदन देने होगा। इस पैन नंबर को आधार कार्ड से जोड़ने के भी सुझाव आए हैं। एक सरकारी अफसर ने बताया कि केंद्र सरकार इस पर पिछले दो साल से विचार कर रही है। इस योजना के पीछे सरकार की सोच साफ है, वो इस पैन नंबर को आधार से लिंक करके सीधे उस शख्स तक पहुंच जाएगी, जो उस इकाई का असली मालिक है। फिर चाहें वो टैक्स देता हो या नहीं। इससे फर्जी कंपनियों, एनजीओ और पोंजी कंपनियां, जिनके जरिए टैक्स चोरी का काम होता है, उन पर सरकार पैनी नजर रख सकेगी।

इसके साथ ही कंपनी प्रमोटर्स, संस्था के अध्यक्षों और ट्रस्टियों को अपने व्यक्तिगत पैन नंबर भी पेश करने को कहा जा सकता है। देश में इस समय 30 करोड़ पैनकार्ड होल्डर हैं। उनमें से सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 15 करोड़ कार्ड धारी आधार से लिंक हो चुके हैं।

कंपनी की पहचान का होगा एक यूनिक पैन नंबर-

पार्टनर एडवाइजरी सर्विस के सचिन सेठ का कहना है कि, ‘देश में बिजनेस के लिए बदले हालातों के बीच एक कंपनी चलाने के लिए कई तरह के रजिस्ट्रेशन कराने होते हैं। ऐसे में बिजनेस और उसे चलाने वाले की पहचान से जुड़े कई यूनिक आईडी होते हैं। ऐसे में सरकार बिजनेस के लिए बड़े इकोसिस्टम को देख रही है, कोशिश यही है कि किसी भी एक बड़ी कंपनी की एक ही यूनिक नंबर से पहचान हो। जैसे कि किसी शख्स की पहचान उसके आधार नंबर से हो जाती है। ऐसा करके सरकार आंकड़े आसानी से जुटा लेगी।’

इस मामले में सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सभी कामों के लिए एक पहचान पत्र होने से कारोबार में सुधार होने के साथ डाटा ट्रांसफर और लिंक होने में मदद मिलेगी। साथ ही कहा है कि यदि आधार सही मायनों में अमेरिका की तरह राष्ट्रीय पहचान बन जाता है तो डीआईएन( Direct Identification Number) के उपयोगिता को खत्म कर देगी। हालांकि ये भी अभी देखना होगा कि पैन नंबर Company identification Number( CIN) की जगह ले पाएगा या नहीं।

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