RTE : बच्चे को अलग बैठाया तो स्कूल की मान्यता खतरे में

Advertisements

इंदौर। शिक्षा अधिकार कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेने वाले कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चे के साथ स्कूल में असमान बर्ताव हुआ तो स्कूल की मान्यता पर बन आएगी। बड़े प्राइवेट स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चे को प्रताड़ित करना या अन्य बच्चों के मुकाबले अलग व्यवहार करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आरटीई नोडल अधिकारी को हर स्कूल में आरक्षित वर्ग के बच्चों की स्थिति का भौतिक परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

शासन के पास अकसर आरटीई के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों को स्कूल में प्रताड़ित करने या अलग-थलग बैठाने की शिकायतें पहुंचती है। स्कूलों को पहले भी कई बार इसके लिए चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन शिकायतों में कमी नहीं आ रही है। एक बार फिर शासन ने जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को नियम कायदे याद दिलाए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र के मुताबिक स्कूल में आरटीई के बच्चों की नियमित उपस्थिति की भी जांच करना है।

यह देखना जरूरी है कि इन बच्चों को सिर्फ रिकॉर्ड में दिखाने के लिए एडमिशन दिया गया है या वास्तव में उसे पढ़ा रहे हैं। नोडल अधिकारी को हर स्कूल में जाकर बच्चों की भौतिक उपस्थिति जांचना होगी। अगर खेल गतिविधि या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इन बच्चों को सामान्य से अलग कर दिया जाता है तो मामले की जांच की जाएगी।

जांच में बच्चों के साथ अभद्रता की शिकायत सही पाई गई तो स्कूल की मान्यता समाप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रत्येक प्राइवेट स्कूल में नर्सरी से पहली कक्षा तक 25 प्रतिशत सीट पर वंचित व कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने का प्रावधान है। इंदौर जिले में करीब 25 हजार विद्यार्थी इस योजना के तहत सीबीएसई, आईसीएसई सहित अन्य एमपी बोर्ड के स्कूलों में प्रवेशित है।

Advertisements