FEATUREDराष्ट्रीय

राज्यसभा से ‘आप’ सांसद संजय सिंह का निलंबन, ये 26 विपक्षी दलों वाले ‘इंडिया’ का यूनिटी टेस्ट है

राज्यसभा से ‘आप’ सांसद संजय सिंह का निलंबन, ये 26 विपक्षी दलों वाले ‘इंडिया’ का यूनिटी टेस्ट है  राज्यसभा से ‘आप’ सांसद संजय सिंह का निलंबन, ये 26 विपक्षी दलों वाले ‘इंडिया’ का यूनिटी टेस्ट है आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को मानसून सत्र के तीसरे दिन सभापति जगदीप धनखड़ ने पूरे सेशन के लिए सस्पेंड कर दिया है। वे राज्यसभा में दूसरे विपक्षी दलों के साथ मणिपुर मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। राज्यसभा से ‘आप’ सांसद का निलंबन, बेंगलुरु की बैठक के बाद 26 विपक्षी पार्टियों का पहला ‘यूनिटी टेस्ट’ है।

 

विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ में शामिल कांग्रेस सहित अन्य दल, आप सांसद को सस्पेंड किए जाने का कितना विरोध करते हैं, यह देखने वाली बात होगी। बेंगलुरु की बैठक से पहले विपक्षी गठबंधन में ‘कांग्रेस’ और ‘आप’ के बीच खींचतान चल रही थी। हालांकि बैठक से 48 घंटे पहले कांग्रेस ने दिल्ली सरकार को लेकर केंद्र द्वारा लाए गए अध्यादेश का विरोध करने की बात कही, तो दोनों दलों के बीच दूरियां कम हो गईं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कह दिया कि वे बेंगलुरु बैठक में शामिल होंगे।

इसे भी पढ़ें-  Live Breaking: पंजाब कांग्रेस चीफ का भगवंत सरकार पर निशाना, कहा- सुखपाल खैरा पर कार्रवाई से हम डरने वाले नहीं; कौन हैं सुखपाल सिंह खेहरा, जिनकी गिरफ्तारी के बाद आपस में भिड़ गईं AAP और कांग्रेस

 

दिल्ली सरकार की शक्तियों पर अंकुश लगाने के मकसद से केंद्र के अध्यादेश को लेकर आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। केजरीवाल का इशारा साफ था कि अगर विपक्षी दल, अध्यादेश के मामले में अपना रूख स्पष्ट नहीं करते हैं, तो ‘आप’ का उनके साथ चलना संदिग्ध रहेगा। 23 जून को पटना में हुई विपक्षी दलों के नेताओं की प्रथम बैठक के दौरान और उससे पहले केजरीवाल की पार्टी की ओर से कहा गया था कि बैठक में अध्यादेश के मुद्दे पर भी चर्चा होनी चाहिए।

बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दोनों ने बैठक में शिरकत की। जब विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रेसवार्ता की तो उसमें ‘आप’ नेता शामिल नहीं हुए। उस वक्त कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था, अध्यादेश का विरोध तो सदन में होता है। अभी से इसका प्रचार क्यों हो रहा है।

इसके बाद जब बेंगलुरु की बैठक की तिथि घोषित हुई, तो दोबारा से केजरीवाल, विपक्ष की मीटिंग में शामिल होने को लेकर आनाकानी करने लगे। उस वक्त नीतिश कुमार और ममता बनर्जी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस बाबत सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से बात की गई। बैठक से 48 घंटे पहले कांग्रेस पार्टी ने केजरीवाल की बात मानकर उन्हें अध्यादेश को लेकर ‘आप’ को समर्थन दे दिया।

इसे भी पढ़ें-  October Changes: विदेश यात्रा होगी महंगी, बंद एलआईसी पॉलिसी चालू कराने का मिलेगा मौका

इससे पहले केजरीवाल ने अध्यादेश के मामले को लेकर बिहार के सीएम नीतिश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, पश्चिम बंगाल की सीएम एवं टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की थी। बेंगलुरु की बैठक में 26 विपक्षी पार्टियों ने मिलकर अपने गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ रखा। कांग्रेस और केजरीवाल के बीच दूरियां कुछ कम होने लगीं। हालांकि दिल्ली सरकार के अध्यादेश के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को अपने ही नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी। केजरीवाल ने मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर उन्हें ट्वीट कर बधाई दी।

इसे भी पढ़ें-  ICC World Cup 2023: वनडे विश्व कप 2023 के लिए भारतीय टीम का एलान, 5 अक्टूबर से होगी क्रिकेट की जंग

राजनीतिक जानकारों का कहना है, चंद दिनों पहले ही ‘इंडिया’ का गठन हुआ है। बेंगलुरु की बैठक के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव को लेकर खटपट की अपुष्ट खबरें आई थीं। हालांकि नीतीश कुमार ने उन खबरों का खंडन किया था। विपक्षी एकता की कड़ी में कांग्रेस और ‘आप’ को अहम माना जा रहा था। आम आदमी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस की पटरी दूसरे दलों के नेताओं के साथ तो बैठ रही थी, मगर ‘आप’ के साथ दिक्कत थी।

चूंकि ‘आप’ को राष्ट्रीय पार्टी को दर्जा मिल चुका है, ऐसे में विपक्षी खेमें में केजरीवाल को हल्के में नहीं लिया जा सकता था। विपक्षी एकता की मजबूती के लिए कांग्रेस और आप का साथ, आना जरूरी था। अब आप सांसद संजय सिंह, मणिपुर के मुद्दे को लेकर राज्यसभा के पूरे सत्र के लिए निलंबित हुए हैं। ये देखना होगा कि उनके निलंबन के खिलाफ अब 26 पार्टियां एक स्वर में विरोध करती हैं या नहीं। इस मामले में कांग्रेस पार्टी पर ही सभी की निगाहें टिकी हैं।