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वसीयत छिपाकर हड़प ली पैतृक भूमि, पीडि़त ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर की जांच व कार्रवाई की मांग

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वसीयत छिपाकर हड़प ली पैतृक भूमि, पीडि़त ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर की जांच व कार्रवाई की मां

कटनी। कुठला थाना अंतर्गत ग्राम पहरूआ में वसीयत में मिली भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के सहारे हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में पीडि़त के द्धारा एक शिकायत पुलिस अधीक्षक को देकर जांच कराते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र की प्रति उपलब्ध कराते हुए कोतवाली के ईश्वरीपुरा वार्ड निवासी तौसीफ रजा पिता जहूर अहमद ने बताया कि उसके साथ गुलाम हरमान पिता मोहम्मद इदरीश ने धोखाधड़ी की है और वसीयत में मिली भूमि को हड़प लिया है। तौसीफ रजा के मुताबिक मृतिका सगीरा बेगम पति इदरीश के नाम पर भूमि 2004 के पूर्व राजस्व रिकार्ड में दर्ज थी। उक्त भूमि सगीरा बेगम के पति मो. इदरीश के द्वारा स्वयं की आय पर अपनी दूसरी पत्नी सगीरा बेगम के नाम क्रय की थी। चूंकि मो. इदरीश की पहली पत्नी कमरून बी की मृत्यु 1950 में हो जाने के पश्चात दूसरी शादी सगीरा बेगम से की थी जबकि इंदरीश की पहली पत्नी से मुन्ना उर्फ जहूर अहमद एवं मुन्नी का जन्म हुआ था। इस प्रकार आवेदक उत्त भूमि के सहदायी उत्तराधिकारी हुये एवं अनावेदक सगीरा का पुत्र है। तौसीफ रजा ने आगें बताया कि सगीरा बेगम के नाम पर जो भूमि दर्ज थी, वह आवेदक के दादा मोहम्मद इदरीश ने अपनी आय से खरीदे गये थे परन्तु मोहम्मद इंदरीश की मृत्यु के पश्चात सगीरा बेगम द्वारा अपने पुत्रो से भेदभाव करते हुये अनावेदक के साथ मिलकर अपने नाम पर दर्ज समस्त संपत्ति की वसीयत केवल अपने ही पुत्रो के नाम कर दी जबकि वह खुद उक्त भूमि का उत्तराधिकारी है। तौसीफ रजा के मुताबिक वसीयतशुदा भूमि ग्राम पहरूआ के रा.नि.मं के खसरा नंबर 150/1, 151/1, 152/1, 152/1 में रकवा 0.439 हेक्टेयर एवं खसरा नंबर 158/1, 158/2, 158/3, 160/4, 160/2, 130/1 में रकवा 0.676 हेक्टेयह की वसीयत केवल अपने ही पुत्र गुलाम हरमान के नाम पर कर दी थी। परन्तु सगीरा के दूसरे पुत्र लियाकत हुसैन मृत की पत्नी एवं पुत्री वतमान में जीवित है, इस कारण सगीरा बेगम अपनी समस्त भूमि की वसीयत विधि अनुसार नहीं कर सकती है। तौसीफ रजा ने यह भी बताया कि सगीरा बेगम की मृत्यु 13 मई 2004 को हो गयी थी, परन्तु गुलाम हरमान के द्वारा सगीरा बेगम की वसीयत का छिपाव करते हुये, राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर बिना किसी विधिक कार्यवाही के बिना सिजरा व शपथपत्र प्रस्तुत किये अपना नाम दर्ज करवा लिया था जबकि वसीयत के अनुसार अन्य उत्तराधिकारी भी थे। नाम दर्ज कराने के बाद उक्त भूमि में से कुछ भूमि का विक्रय कर दिया गया है। उसके पश्चात जानबूझकर वर्ष 2009-10 में तहसीलदार के समक्ष वसीयत के आधार पर नामांतरण आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था। उक्त कार्यवाही अन्य उत्तराधिकारियों को धोखा देने हेतु जानबूझकर की गयी है। अनावेदक द्वारा की गयी छल पूर्वक कार्यवाही से अन्य उत्तराधिकारियों को अपनी संपत्ति व अधिकारो से वंचित होना पड़ा है। इस प्रकार गुलाम हरमान ने बांकी उत्तराधिकारियों का हिस्सा हड़प कर लिया है जो कि भारतीय न्याय संहिता एवं भारतीय दंड सहिता के अधीन दंडनीय अपराध है। तौसीफ रजा ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जांच कराते हुए गुलाम हरमान पर कार्रवाई की मांग की है।

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