अंतरिक्ष में अमेरिका का बड़ा खुलासा: स्पेस में तैनात किए ‘स्पेस कंट्रोल’ हथियार; रूस-चीन को दी सख्त चेतावनी
अंतरिक्ष में अमेरिका का बड़ा खुलासा: स्पेस में तैनात किए ‘स्पेस कंट्रोल’ हथियार; रूस-चीन को दी सख्त चेतावनी
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका ने इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि उसने अंतरिक्ष की कक्षा (ऑर्बिट) में हथियार तैनात कर रखे हैं। US एयर फोर्स के सेक्रेटरी ट्रॉय मींक और US स्पेस फोर्स ने चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए चेतावनी दी कि अमेरिकी और सहयोगी ताकतों को दुश्मन के आक्रामक हमलों से बचाने के लिए ‘ऑन-ऑर्बिट’ (On-Orbit) हथियारों की मौजूदगी बेहद जरूरी थी।
मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित ‘एयर, स्पेस और साइबर कॉन्फ्रेंस’ के दौरान यह ऐतिहासिक घोषणा की गई, हालांकि सुरक्षा कारणों से इन हथियारों की विशिष्ट तकनीकों और विवरण को गुप्त रखा गया है।
अमेरिका ने बयान में क्या कहा?
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हमले और बचाव दोनों में सक्षम: US स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के अनुसार, ये स्पेस कंट्रोल हथियार दुश्मन की आक्रामक क्षमताओं को बेअसर करने के लिए ‘काइनेटिक’ (भौतिक हमले) और ‘नॉन-काइनेटिक’ (लेजर, जैमिंग या साइबर) दोनों तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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स्पेस डोमेन पर नियंत्रण: अमेरिकी सेना का मानना है कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष पर दबदबा ही जीत तय करेगा, इसलिए रक्षात्मक के साथ-साथ आक्रामक रणनीतियां भी बनाई गई हैं।
1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ और सैन्यीकरण
अंतरिक्ष का सैन्यीकरण 1957 में स्पुतनिक के प्रक्षेपण के साथ ही शुरू हो गया था। हालांकि, 1967 की ‘आउटर स्पेस ट्रीटी’ (Outer Space Treaty) ने कक्षा में परमाणु या ‘बड़े पैमाने पर विनाश वाले हथियारों’ (WMD) पर प्रतिबंध लगा दिया था।
लेकिन इसके बावजूद भारत, अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों ने ऐसे एंटी-सैटेलाइट (ASAT) और स्पेस-कंट्रोल सिस्टम विकसित कर लिए हैं जो इस संधि के कानूनी दायरे का उल्लंघन किए बिना विरोधी देश के उपग्रहों को निशाना बना सकते हैं।








