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एयरपोर्ट पर ‘अमचूर’ ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया

एयरपोर्ट पर 'अमचूर' ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया

एयरपोर्ट पर 'अमचूर' ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया

एयरपोर्ट पर ‘अमचूर’ ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया।  यदि आप हवाई यात्रा (Flight Journey) करने जा रहे हैं और अपने साथ खाने-पीने का सामान या घरेलू मसाले ले जाने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! रसोई का एक साधारण सा मसाला ‘अमचूर’ आपको सीधा जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है और आप पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी (NDPS एक्ट) की गंभीर धाराएं लग सकती हैं।

एयरपोर्ट पर ‘अमचूर’ ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया

ऐसा ही एक खौफनाक और चौंकाने वाला मामला मध्य प्रदेश में सामने आया है, जहां एयरपोर्ट की मशीन की एक तकनीकी खराबी के कारण एक निर्दोष इंजीनियर को 57 दिनों तक जेल की हवा खानी पड़ी थी। अब इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पीड़ित को 10 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश जारी किया है।

क्या था पूरा मामला? (जब अमचूर बन गया ‘हेरोइन’)

यह अजीबोगरीब घटना ग्वालियर के रहने वाले इंजीनियर अजय सिंह के साथ हुई थी। साल 2010 में वे दिल्ली जाने के लिए भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचे थे। सुरक्षा जांच (Security Check) के दौरान उनके पास मौजूद बैग को जब स्कैनर से गुजारा गया, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए।

57 दिन बाद फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने सबको चौंकाया

इंजीनियर अजय सिंह लगातार जेल के अंदर से चिल्लाते रहे कि साहब, वह नशा नहीं बल्कि सब्जी में डालने वाला अमचूर मसाला है, लेकिन सिस्टम ने उनकी एक न सुनी। आखिरकार, कोर्ट के आदेश पर जब उस पाउडर को जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) भेजा गया, तो 57 दिनों के बाद आई रिपोर्ट ने पुलिस और एयरपोर्ट प्रशासन के पैरों तले जमीन खिसका दी। फॉरेंसिक जांच में आधिकारिक तौर पर पुष्टि हुई कि वह कोई मादक पदार्थ नहीं, बल्कि महज एक साधारण अमचूर पाउडर था।

16 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिला न्याय

जेल से रिहा होने के बाद अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा, करियर को हुए नुकसान और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ अजय सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पूरे 16 साल चली इस कानूनी लड़ाई के बाद अब हाई कोर्ट ने माना कि यह सुरक्षा एजेंसियों की घोर और अक्षम्य लापरवाही थी।

न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने सरकार को आदेश दिया है कि पीड़ित इंजीनियर को मानसिक पीड़ा और मानहानि के मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये का भुगतान किया जाए। यह फैसला देश के सभी हवाई अड्डों के लिए एक कड़ा सबक है कि वे केवल मशीनों के भरोसे किसी निर्दोष की जिंदगी और आजादी से खिलवाड़ न करें।

एयरपोर्ट पर ‘अमचूर’ ले जाना पड़ेगा भारी, लग सकती है ड्रग तस्करी की धारा; हाई कोर्ट के इस फैसले ने सबको चौंकाया

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