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Amarnath Yatra: छड़ी मुबारक बुधवार को शेषनाग से पंजतरणी के लिए रवाना,छड़ी मुबारक की पूजा संग अमरनाथ यात्रा का समापन, 4.42 लाख भक्तों ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

Amarnath Yatra: छड़ी मुबारक बुधवार को शेषनाग से पंजतरणी के लिए रवाना,छड़ी मुबारक की पूजा संग अमरनाथ यात्रा का समापन, 4.42 लाख भक्तों ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन छड़ी मुबारक की पूजा के साथ श्री अमरनाथ वार्षिक यात्रा का समापन हो गया। इस बार करीब साढ़े चार लाख भक्तों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। अमरनाथ यात्रा की छड़ी मुबारक गुरुवार अलसुबह पवित्र गुफा में पहुंची। सूर्योदय से पहले छड़ी मुबारक को पवित्र मंदिर में ले जाया गया। पवित्र गुफा में भगवान शिव की पूजा के साथ ही इस वर्ष की तीर्थ यात्रा भी संपन्न हो गई।

 

छड़ी मुबारक बुधवार को शेषनाग से पंजतरणी के लिए रवाना

छड़ी मुबारक बुधवार को शेषनाग से पंजतरणी के लिए रवाना हुई थी। गुरुवार को पंजतरणी से छड़ी मुबारक पवित्र गुफा पहुंची और पूजा-अर्चना और दर्शन के साथ ही 62 दिन की बाबा अमरनाथ की यात्रा पूरी हुई। एक अधिकारी ने बताया कि यात्रियों का आखिरी जत्था 23 अगस्त को पवित्र गुफा के लिए रवाना हुआ था। उन्होंने कहा कि यात्रा के शुरुआत के साथ ही तीर्थयात्रियों खासा उत्साह देखने को मिला। 2022 में करीब तीन लाख तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। वहीं, इस वर्ष 4.42 लाख भोले के भक्तों ने दर्शन किए।

जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बडशाह चौक इलाके में स्थित दशनामी अखाड़े से गत शनिवार की सुबह पवित्र छड़ी मुबारक को संरक्षक महंत दीपेंदर गिरी की अगुवाई में श्रीनगर से पहलगाम के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया था।

इस अवसर पर देश भर से आए साधु संत इस छड़ी के साथ पवित्र अमरनाथ जी की यात्रा के लिए रवाना हुए। महंत दीपेंदर गिरी ने कहा कि सुरेश्वर मंदिर श्रीनगर, पाम्पोर शिव मंदिर, बिजबिहाड़ा और फिर मार्तण्ड मंदिर में पूजन के बाद पहलगाम में लिद्दर नदी के पास गणेश जी के मंदिर में पूजन किया।

पहलगाम में दशमी और एकादशी की रात विश्राम किया। द्वादसी (28 अगस्त) को चंदनवाड़ी में रुके। 29 अगस्त को शेषनाग में, चतुर्दशी (30 अगस्त) पंचतरणी में रुके। 31 अगस्त को सूर्य उदय के साथ ही छड़ी मुबारक को पवित्र अमरनाथ गुफा में स्थापित कर वैदिक मंत्रों से पूजा की गई। 31 अगस्त को रात्रि पड़ाव पंचतरणी में होगा।

एक सितंबर को शेषनाग और चंदनबाड़ी होते हुए पहलगाम में रात्रि पड़ाव होगा। दो सितंबर में लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन के बाद महात्माओं के भोज के साथ इस वर्ष की पवित्र यात्रा पूर्ण होगी।

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