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स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में भेदभाव का आरोप, निजी नर्सिंग स्कूल कॉलेज से डिप्लोमा लेने वालों को परीक्षा पास करने के बावजूद मौका नहीं; सीएम से हस्तक्षेप की मांग

स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में भेदभाव का आरोप, निजी नर्सिंग स्कूल कॉलेज से डिप्लोमा लेने वालों को परीक्षा पास करने के बावजूद मौका नहीं; सीएम से हस्तक्षेप की मांग

कटनी। स्वास्थ्य विभाग में 3,323 पदों भर्ती निकली है। जिसमें एएनएम के 2,576, रेडियोग्राफर तृतीय श्रेणी के 104, प्रयोगशाला तकनीशियन के 228 व फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के 415 पद शामिल है।

कर्मचारी चयन मंडल द्धारा गत 12 फरवरी को घोषित परीक्षा परिणामों की कड़ी में ये नियुक्तियां की जा रही हैं। परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यार्थियों के दस्तावेज व मेडिकल के लिए जिला चिकित्सालय में टीम बनाकर शिविर लगाए गए।

इतना सब तो ठीक था लेकिन इन विशेष शिविर में अपने दस्तावेज लेकर पहुंचे उन अभ्यार्थियों को निराशा हाथ लगी, जिन्होने निजी नर्सिंग स्कूल या कॉलेज से नर्सिंग का डिप्लोमा लिया है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्धारा दस्तावेज सत्यापन के लिए गठित टीम के सामने जब निजी नर्सिंग स्कूल व कॉलेज से डिप्लोमा लेने वाले अभ्यार्थी पहुंचे तो उन्हे यह कहकर भगा दिया गया कि यह भर्ती केवल सरकारी नर्सिंग स्कूल व कॉलेज से डिप्लोमा लेने वाले अभ्यार्थियों के लिए है।

अब सवाल उठता है कि क्या यह नियम प्रदेश की राजधानी भोपाल स्तर से जारी किए गए या यहां गठित टीम ने भर्ती प्रक्रिया में कमाई करने के लिए अपने से नियम बना लिया। क्योंकि निजी नर्सिंग स्कूल या कॉलेज से डिप्लोमा लेने वाले अभ्यार्थियों का कहना था कि कर्मचारी चयन मंडल द्धारा आयोजित परीक्षा का फार्म भरते समय उनके द्धारा निजी नर्सिंग स्कूल या कॉलेज का ही डिप्लोमा लगाया गया था।

इसलिए कर्मचारी चयन मंडल को उसी समय उनका फार्म रिजेक्ट कर देना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया और अब जब उन्होंने परीक्षा पास कर ली है तो नए नियम बताकर उन्हे नौकरी से वंचित किया जा रहा है।

ऐसे अभ्यार्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का ध्यान इस ओर आकर्षित कराते हुए कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले तथा निजी नर्सिंग स्कूल कॉलेज से डिप्लोमा लेने वाले अभ्यार्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव न करते हुए पात्रता प्रदान करने की मांग की है।

हालांकि दस्तावेज सत्यापन व मेडिकल की अवधि 26 फरवरी थी लेकिन इस अवधि में कई अभ्यार्थी निराश होकर भी लौट चुके हैं।

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