निविदा शर्तों के अनुसार जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को नहीं मिल रहा भोजन, ठेका कंपनी की लापरवाही पर प्रभारी लिपिक ने लिखा सिविल सर्जन को पत्र, व्यवस्था में सुधार की मांग

कटनी(YASHBHARAT.COM)। जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को शासन द्वारा निर्धारित निविदा शर्तों के अनुसार भोजन प्रदाय न करने के संबंध में जिला चिकित्सालय के भोजनालय प्रभारी लिपिक द्धारा एक पत्र सिविल सर्जन को लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग की गई है। पत्र में प्रभारी लिपिक ने सिविल सर्जन को बताया है कि राज तिवारी (मेसर्स: रघुकुल सामजिक सेवा एवं मानन कल्याण संस्थान शहडोल) को जिला चिकित्सालय कटनी में भर्ती गर्भवती माताओं, सामान्य मरीजो को पका कर चाय, नास्ता, विस्किट, टोस, दूध एवं दोनों समय का भोजन शासन द्वारा निर्धारित मेनू व निविदा शर्तों के अनुसार भोजन प्रदाय करने हेतु ठेका दिया गया है। जिसके तहत ठेका लेने वाली फर्म को 8 जुलाई 2025 को भोजनालय सौंपते हुए 9 जुलाई 2025 से भोजन प्रदाय के निर्देश दिये गये हैं। इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार द्वारा निविदा अनुबंध के किसी भी शर्त का पालन नहीं किया जा रहा है एवं न ही शासन द्वारा निर्धारित निविदा शर्तों के अनुसार मरीजो को निर्धारित मात्रा में भोजन प्रदाय नहीं किया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा सुबह की चाय 9 बजे के बाद बांटी जाती है एवं चाय कप में न बांट कर जो मरीज ग्लास अपने साथ लाते हैं, उसमें बिना नाप के दी जाती है। साथ ही जिस मरीज के पास ग्लास नहीं होती उन्हें चाय नहीं दी जाती है। इनके द्वारा निर्धारित माप के अनुसार निर्धारित समय पर डिस्पोजबल कप में चाय नहीं दी जाती है। इसी तरह ठेकेदार द्वारा ठेका प्रारंभ के बाद मात्र तीन दिन ही गर्भवती माताओं की फल दिया गया, इसके बाद फल नहीं दिया जा रहा है। वहीं गर्भवती माताओं को 100 ग्राम गुड का लड्डू दिये जाने का प्रावधान है, किन्तु इनके द्वारा मात्र 40-50 ग्राम का गुड का लड्डू कुछ माताओं को दिया जाता है, सभी की वह भी नहीं दिया जाता है। लड्डू में मेवा की मात्रा न के बराबर रहती है। गर्भवती माताओं को दो बार 250 एमएल दूध दिया जाना है एवं समान्य मरीजों को दिन में एक बार दिये जाने का प्रावधान है किन्तु ठेकेदार द्वारा गर्भवती माताओं को दिन में एक बार 200 एमएल दूध ही कुछ माताओं को दिया जा रहा है एवं शाम के समय दूध का वितरण नहीं किया जा रहा है। इसकी सत्यता की जांच मरीजों की संख्या एवं दुग्ध संघ मर्यादित जबलपुर के देयक को देख कर किया जा सकता है। इसी तरह सुबह का नास्ता बिना मात्रा निर्धारण के प्रात: 10 बजे के बाद दिया जाता है, यह भी प्लेट में नहीं किया जाता है। दोपहर एवं शाम का भोजन थाली में नहीं दिया जाता है एवं भोजन देने का कोई भी मापदंड नहीं है। जो मरीज थाली लिये रहते है वे तो थाली में ले लेते है किन्तु जिन मरीजो के पारा थाली नहीं होती वे भोजन नहीं ले पाते या कटोरे में लेते भी हंै। भोजन में भी शासन द्वारा निर्धारित मात्रा में रोटी, दलिया, दाल व शब्जी नहीं दी जाती है तथा दाल एवं शब्जी पतली रहती है। ठेकेदार द्वारा सलाद तो प्रारंभ के दिन से ही नहीं दी जा रही है। भोजन के गुणवत्ता आदि का कोई भी निर्धारण नहीं है। प्रभारी लिपिक के मुताबिक मरीजो को भोजन खंड वाली थाली में देने के निर्देश हंै एवं उन्हें भोजन वितरण पश्चात संकलित कर वार्ड में कार्यरत नर्सिंग आफीसरों से दिये गये भोजन की संख्या का सत्यापन कराया जाना है, किन्तु इनके द्वारा नहीं कराया जा रहा है। जिससे यह स्पस्ट नहीं हो पा रहा है कि किस वार्ड में किस दिन कितने मरीजो की भोजन प्रदान किया गया है। ठेकेदार तो स्वयं उपस्थित रहते नहीं उनके कर्मचारियों को यदि किसी प्रकार का सुझाव व सुधार हेतु निर्देश दिये जाते है वे उसका पालन नहीं कर रहे हंै। ठेकेदार द्वारा निविदा अनुबंध के किसी भी शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। इनके द्वारा किसी प्रकार का रजिस्टर का संधारण अभी तक बार-बार बोलने पर भी नहीं किया गया है। जिसके कारण भोजन प्राप्त करने वाले मरीजों की संख्या का भी सत्यापन किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। लिपिक ने सिविल सर्जन से पत्र पर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

 

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