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गूगल मैप की एक गलत स्पेलिंग ने रोका पूरे गांव का विकास, ‘आकलाबाद’ बना ‘अकिलाबाद’ तो ठप हुए सरकारी काम

गूगल मैप की एक गलत स्पेलिंग ने रोका पूरे गांव का विकास, 'आकलाबाद' बना 'अकिलाबाद' तो ठप हुए सरकारी काम

गूगल मैप की एक गलत स्पेलिंग ने रोका पूरे गांव का विकास, ‘आकलाबाद’ बना ‘अकिलाबाद’ तो ठप हुए सरकारी काम

 फिरोजाबाद: तकनीक और डिजिटल क्रांति के इस दौर में एक छोटी सी तकनीकी चूक आम जनता पर कितनी भारी पड़ सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण फिरोजाबाद जिले में देखने को मिल रहा है। ब्लॉक नारखी के तहत आने वाली ग्राम पंचायत ‘आकलाबाद हसनपुर’ के ग्रामीण इन दिनों एक अजीबोगरीब समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या का कारण कोई सरकारी बाबू या कागजी हेरफेर नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेविगेशन ऐप ‘गूगल मैप’ है। गूगल मैप पर गांव के नाम की स्पेलिंग गलत दर्ज होने के कारण ग्रामीणों के सभी डिजिटल और ऑनलाइन काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। पात्रों को मिलेगा उनका हक! ढीमरखेड़ा में पटवारियों और वन विभाग को सख्त निर्देश, ग्राम सभा होगी सबसे पावरफुल

 सिस्टम क्यों कर रहा है आवेदन ‘ऑटो-रिजेक्ट’?

सरकारी और राजस्व अभिलेखों में इस ग्राम पंचायत का असली नाम आकलाबाद हसनपुर दर्ज है। लेकिन जब इसे गूगल मैप पर सर्च किया जाता है, तो वहां इस गांव की लोकेशन अकिलाबाद हसनपुर दिखाई देती है।

  • तकनीकी पेंच: आज के डिजिटल समय में विभिन्न कल्याणकारी सरकारी योजनाओं के ऑनलाइन पोर्टल, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज (जैसे पहचान पत्र आदि) के वेरिफिकेशन के लिए बैकएंड में गूगल मैप के जीपीएस (GPS) डेटा का इस्तेमाल करते हैं।

  • नाम का मिसमैच: जब भी कोई ग्रामीण अपने दस्तावेज बनवाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर सही नाम ‘आकलाबाद’ दर्ज करता है, तो सिस्टम उसका मिलान नहीं कर पाता, क्योंकि पोर्टल के बैकएंड में गूगल का ‘अकिलाबाद’ फीड है। इस नाम के मिसमैच होने के कारण सिस्टम हर आवेदन को ऑटो-रिजेक्ट कर देता है।

 अफसरों ने फाइलों में ही सुलझा दी समस्या?

इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम प्रधान नीरज के भाई सोनवीर ने एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें एक शिकायती पत्र सौंपा। सोनवीर ने प्रशासन को बताया कि इससे पहले भी ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में इस तकनीकी खराबी की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी।

उसे समय मामले की जांच खंड विकास अधिकारी (BDO) नारखी को सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी स्तर पर नाम में सुधार करने या गूगल से संपर्क करने के बजाय, तकनीकी टीम ने लापरवाही दिखाई। टीम ने अपनी रिपोर्ट में गूगल मैप पर दिख रहे गलत नाम को ही सही ठहरा दिया और बिना नाम सुधारे शिकायत को फाइलों में निस्तारित (हल) दिखाकर बंद कर दिया।

अब सीधे गूगल को पत्र लिखेगा प्रशासन

मामला दोबारा उजागर होने और मीडिया में आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मची है। एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि यह अपनी तरह का पहला और बेहद अनोखा मामला है। गूगल मैप की एक गलत स्पेलिंग ने रोका पूरे गांव का विकास, ‘आकलाबाद’ बना ‘अकिलाबाद’ तो ठप हुए सरकारी काम

उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि इस तकनीकी गड़बड़ी को दूर करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सीधे गूगल (Google) कंपनी को एक आधिकारिक पत्र लिखा जाएगा, ताकि वे अपने सैटेलाइट और मैप डेटाबेस में गांव का नाम सुधार सकें। प्रशासन का कहना है कि नाम सुधरते ही ऑनलाइन पोर्टल काम करने लगेंगे और ग्रामीणों के रुके हुए जरूरी दस्तावेज समय पर जारी हो सकेंगे

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