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खरगोन के 295 साल पुराने बांकी माता मंदिर में आस्था व विज्ञान का संगम, मां को लगता है 501 पान के बीड़ों का भोग

खरगोन के 295 साल पुराने बांकी माता मंदिर में आस्था व विज्ञान का संगम, मां को लगता है 501 पान के बीड़ों का भोग

खरगोन के 295 साल पुराने बांकी माता मंदिर में आस्था व विज्ञान का संगम, मां को लगता है 501 पान के बीड़ों का भोग

खरगोन के 295 साल पुराने बांकी माता मंदिर में आस्था व विज्ञान का संगम, मां को लगता है 501 पान के बीड़ों का भोग

खरगोन: शहर के मध्य स्थित प्राचीन बांकी माता मंदिर में सदियों पुरानी आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नवरात्रि महापर्व के दौरान यहां निभाई जाने वाली एक विशेष परंपरा न केवल अध्यात्म का प्रतीक है, बल्कि सेहत और आरोग्य का भी अनूठा संदेश देती है।खरगोन के 295 साल पुराने बांकी माता मंदिर में आस्था व विज्ञान का संगम, मां को लगता है 501 पान के बीड़ों का भोग

295 वर्ष पुरानी परंपरा और पान का भोग

करीब 295 वर्ष प्राचीन इस ऐतिहासिक मंदिर में सदियों से नवरात्रि के दौरान माता रानी को विशेष रूप से पान के बीड़े और ज्वार की धानी का भोग अर्पित किया जाता है। समय के साथ-साथ श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा बढ़ती गई और कभी महज एक पान के बीड़े से शुरू हुआ यह सिलसिला आज 501 पान के बीड़ों तक पहुंच चुका है।

सेहत और विज्ञान का संदेश

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस भोग के पीछे गहरा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी छिपा है। नवरात्रि के समय मौसम परिवर्तन (ऋतु संधि) होता है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है। आयुर्वेद और विज्ञान के दृष्टिकोण से पान और भुनी हुई ज्वार की धानी का सेवन शरीर की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, डिटॉक्स करने और मौसमी बीमारियों से बचाव में बेहद लाभकारी माना गया है। यही कारण है कि मंदिर की यह परंपरा अध्यात्म के साथ-साथ आरोग्य का भी संदेश फैलाती है।

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