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5 साल नौकरी की बाध्यता से मिली मुक्ति, NFIR व पमरे मजदूर संघ ने उठाई थी आवाज

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जबलपुर । NFIR व पमरे मजदूर संघ को फिर एक बार बड़ी सफलता हाथ लगी है। रेलवे बोर्ड ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्त विधवा रेल कर्मचारियों को इंटर रेलवे ट्रांसफर के लिए मिनिमम 5 साल की नौकरी की बाध्यता को समाप्त कर दिया है।

स्थानान्तरण के लिए मिनिमम 5 साल की नौकरी की बाध्यता थी

वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री अशोक शर्मा ने बताया कि अभी तक अनुकंपा के आधार पर नियुक्त विधवा रेल कर्मचारी समेत सभी रेल कर्मचारियों को अन्य जोन में स्थानान्तरण के लिए मिनिमम 5 साल की नौकरी की बाध्यता थी । एनएफआईआर के कार्यकारी अध्यक्ष व डब्ल्यूसीआरएमएस के अध्यक्ष डॉ. आरपी भटनागर द्वारा रेलवे बोर्ड में स्थानान्तरण के लिए 5 साल की नौकरी की बाध्यता को समाप्त करने का मुद्दा लगातार उठाया गया, जिस पर फिलहाल रेलवे बोर्ड ने 7 जून 2019 को विधवा रेल कर्मचारी को अंतर रेलवे स्थानान्तरण के लिए 5 साल की नौकरी की बाध्यता से मुक्ति का आदेश 7 जून 2019 को जारी कर दिया है । संघ प्रवक्ता सतीश कुमार ने बताया कि हजारों विधवाओं को फायदा मिलेगा, जिससे वह अपने गृह नगर जा सकेंगी उक्त निर्णय से रेल कर्मचारियों में हर्ष व्याप्त है ।

संघर्षरत है मजदूर संघ

डब्ल्यू.सी.आर.एम.एस. के कार्यकारी महामंत्री सतीश कुमार, मंडल अध्यक्ष एसएन शुक्ला, मंडल सचिव डीपी अग्रवाल, संयुक्त महासचिव एसके वर्मा, सविता त्रिपाठी, शेख फरीद , विष्णु देव शाह, राकेश सिंह, सुनील टेक चंदानी, के के साहू, एस.आर. बाउरी, एस.के. श्रीवास्तव, अवधेश तिवारी, दीना यादव, जी.पी. सिंह, आर.ए. सिंह आदि ने हर्ष व्यक्त किया एवं सभी रेल कर्मचारियों को भी स्थानान्तरण के लिए 5 साल की बाध्यता हटाने के लिए संघर्षरत है ।

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