साढ़े 3 करोड़ TA घोटाला: मृत आरक्षक पर ठीकरा फोड़ने का आरोप, जांच पर उठे गंभीर सवाल
साढ़े 3 करोड़ TA घोटाला: मृत आरक्षक पर ठीकरा फोड़ने का आरोप, जांच पर उठे गंभीर सवाल
साढ़े 3 करोड़ TA घोटाला: मृत आरक्षक पर ठीकरा फोड़ने का आरोप, जांच पर उठे गंभीर सवाल।विशेष सशस्त्र बल (SAF) की छठवीं बटालियन में सामने आए करीब ₹3.5 करोड़ के यात्रा भत्ता (TA) घोटाले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस जांच की धीमी रफ्तार और संदिग्ध पहलुओं के चलते पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
साढ़े 3 करोड़ TA घोटाला: मृत आरक्षक पर ठीकरा फोड़ने का आरोप, जांच पर उठे गंभीर सवाल
मृत आरक्षक पर डालने की कोशिश?
मृत आरक्षक अभिषेक झारिया के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
पहले अभिषेक पर घोटाले में शामिल होने का दबाव बनाया गया
फिर उसके लापता होने के बाद पूरे घोटाले का ठीकरा उसी पर फोड़ने की कोशिश की गई
इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि असल आरोपियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
गायब मोबाइल बना सबसे बड़ा सवाल
मामले में सबसे रहस्यमय पहलू है अभिषेक का मोबाइल फोन:
शव के पास बैग, चाबी सहित अन्य सामान सुरक्षित मिला
लेकिन मोबाइल फोन गायब था
एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी पुलिस फोन बरामद नहीं कर सकी
यह मोबाइल इस घोटाले का सबसे बड़ा सबूत हो सकता था, जिससे सच्चाई सामने आ सकती थी।
फरार बाबू पर शक गहराया
इस मामले में बटालियन के लिपिक सत्यम शर्मा की भूमिका भी संदेह के घेरे में है:
घटना से एक दिन पहले वह अभिषेक के साथ देखा गया
उसके बाद अभिषेक लापता हो गया
आरोप है कि सत्यम ने साथियों से संपर्क कर सारी जिम्मेदारी अभिषेक पर डालने को कहा
सबसे बड़ी बात — सत्यम शर्मा अभी तक फरार है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस जांच पर सवाल
नामजद आरोपियों को तय करने में देरी
फरार आरोपी की गिरफ्तारी नहीं
अहम सबूत (मोबाइल) का गायब होना
इन सब वजहों से रांझी पुलिस की जांच प्रक्रिया संदिग्ध नजर आ रही है।
यह मामला सिर्फ आर्थिक घोटाले का नहीं, बल्कि संभवतः साजिश, सबूत छिपाने और सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला एक व्यक्ति पर दोष डालकर बंद करने की कोशिश बन सकता है।