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2 जी घोटाले की इन 10 बड़ी बातों को जानकार हैरान रह जाएंगे आप

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वेब डेस्क। मनमोहन सरकार को सत्ता से बाहर करने वाले विवादित 2जी घोटाले पर फैसला आ चुका है। लगातार 6 साल तक चले मुकदमे के बाद दिल्ली के पटियाला हाउस में सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी समेत सभी को बरी कर दिया। हम बता रहे हैं इस घोटाले से जुड़ी 10 बड़ी बातें जो करेंगी आपको हैरान…

 

1- 6 साल तक चले इस मामले में ओ. पी. सैनी की स्पेशल कोर्ट से यह फैसला आया। 2G केस में सुनवाई के दौरान कई नाटकीय तर्क देखने को मिले थे। सीबीआई के वकील ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर और मुख्य आरोपी ए. राजा को ‘बड़ा झूठा’ बताया था जबकि राजा ने कहा था कि एजेंसियां रस्सी को सांप बता रही हैं।

 

2- नवंबर 2010 में CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद 2G मामला सुर्खियों में आया। इसमें बताया गया कि सरकार को 1.76 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। कई अखबारों ने छोटी हेडिंग के लिए केवल 1,76,00,00,000,000 रुपया ही लिखा था।

3- स्पेशल जज ओपी सैनी के समक्ष तीन मामले आए, दो सीबीआई ने रजिस्टर किए थे जबकि एक ED ने। CBI के पहले केस में राजा और कनिमोझी को मुख्य आरोपी बताया गया। आरोप लगा कि राजा के मंत्री रहते दूरसंचार मंत्रालय ने पहले आवेदन करने की डेडलाइन 1 अक्टूबर 2007 तय की। इसके बाद आवेदन प्राप्त करने की कट-ऑफ डेट बदलने से 575 में से 408 आवेदक रेस से बाहर हो गए।

4- दूसरा आरोप लगा कि ‘पहले आओ पहले पाओ’ की पॉलिसी का उल्लंघन किया गया। तीसरा आरोप, उन कंपनियों की योग्यता पर सवाल उठाए गए, जिनके पास कोई अनुभव नहीं था। चौथा आरोप, नए ऑपरेटरों के लिए एंट्री फी का संशोधन नहीं हुआ।

5- कई बार राजा ने कोर्ट में यह कहा कि उन्होंने जो भी बड़े फैसले लिए, उसकी जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी थी। उन्होंने कहा था कि TRAI ने ‘अनुभव’ वाले प्रावधान को खत्म कर दिया था। उनका दावा था कि प्राधिकरण ने कहा था कि जो भी फर्म 1650 करोड़ रुपये जमा करेगी वह स्पेक्ट्रम की नीलामी में शामिल होने के योग्य होगी।

6- राजा के तमाम सनसनीखेज आरोपों पर CBI ने उन्हें बड़ा झूठा बताते हुए सबसे बड़ा आरोपी बताया जिसने अनुभवहीन कंपनियों को लाइसेंस बांट दिए। प्रवर्तन निदेशालय ने अपने मामले में अप्रैल 2014 में 19 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जिनमें राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, विनोद गोयनका, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, करीम मोरानी और शरद कुमार शामिल हैं।

7- राजा के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित होते तो उन्हें उम्रकैद की सजा हो सकती थी। ED का कहना है कि कलाइगनर टीवी और DB Realty के बीच 200 करोड़ के ट्रांजैक्शन हुए। यह पैसा Dynamix Realty से कुसेगांव फ्रूट्स ऐंड वेजीटेबल्स और सिनेयुग फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड से होकर कलाइगनर टीवी तक पहुंचा। CAG की रिपोर्ट में सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। बाद में सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट में 30 हजार करोड़ के नुकसान की बात दिखाई गई।

8- कनिमोझी के वकील ने कहा है कि CBI और ED द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘2G केस GSM और CDMA ऑपरेटरों के बीच का विवाद (COAI vs AUSPI) है। दूसरों को भी इससे नुकसान हुआ।’ COAI सेलुलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया है जबकि AUSPI असोसिएशन ऑफ यूनिफाइड टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया है।

9- DMK चीफ एम. करुणानिधि की पत्नी से उनके घर पर पूछताछ हुई और सिनेयुग के दफ्तर परिसर से शेयर समझौते की मूल प्रति बरामद हुई। पहले मामले में राजा और कनिमोझी के साथ-साथ पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के तत्कालीन निजी सचिव आर के चंदोलिया, स्वान टेलीकाम के प्रवर्तक शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा, रिलायंस धीरुभाई अंबानी ग्रुप (आरएडीएजी) के तीन आला अधिकारी-गौतम दोषी, सुरेंद्र पिपारा और हरी नायर आरोपी बनाए गए थे।

10- मामले के अन्य आरोपियों में कुसेगांव फ्रूट्स ऐंड वेजिटेबल्स के निदेशक आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, कलाइगनर टीवी के निदेशक शरद कुमार और बॉलिवुड के निर्माता करीम मोरानी भी थे। दूरसंचार कंपनी स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिटेक वायरलैस (तमिलनाडु) भी मामले में आरोपी हैं। दूसरे सीबीआई मामले में एस्सार ग्रुप के प्रवर्तक रवि रुइया और अंशुमान रुइया, लूप टेलकाम की प्रवर्तक किरण खेतान और उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के निदेशक विकास सर्राफा आरोपी हैं।

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