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19 अपात्र , सिर्फ 1 का साक्षात्कार

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जबलपुर नगर प्रतिनिधि । व्यापम मुद्दा जब सामने आया तब इस पर लंबी बहस चली की योग्य उमीदवारों की महत्वकांक्षाओं का गला दबाकर पदों को बेच दिया जा रहा है । मामले को लेकर हाय तौबा मची । जिमेदारों के बयानों से महसूस हुआ कि शायद अब शासकीय विभागों में पदों को बेचने का क्रम बंद हो जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं पदों को बेचने का क्रम आज भी बदस्तूर जारी है । ऐसी बानगी आज फिर देखने को मिली जब नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा महाविद्यालय में कुलपति के निजी सचिव के पद को ही बेच दिया गया।
2017 में दिया था विज्ञापन.
सन 2017 में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा
महाविद्यालय द्वारा निजी सचिव के पद के लिए
समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया गया था । इस पद
हेतु पे स्केल 44 सो रुपए था जो राजपत्रित ऑफिसर
की रैंक का है। जिसमें 20 उमीदवारों ने इस पद के
लिए आवेदन किया था।
19 उमीदवार अपात्र एक चयनित.
वेटरनरी विश्वविद्यालय प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को
पोसने की नियत से 20 आवेदनों में से 19 आवेदन
निरस्त कर दिए गए मात्र एक ही अपना पसंदीदा
उमीदवार को पात्रता प्रदान कर दी गई।
दस लाख में बेच दिया पद.विटनरी विवी में तो ये भी
हल्ला हैं कि निजी सचिव का यह पद 10
लाख की कीमत पर बेचा जा रहा है। 19
उमीदवारों को अपात्र घोषित करके
एक ही उमीदवार जिसका नाम
सुनील जैन बताया गया है इस पद के
लिए 10 लाख देने को तैयार हुए हैं।
विवादित है वाय पी साहनी.
स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन और इस पद
के लिए साक्षात्कार लेने वाले वाय पी साहनी
पूर्व में भी अनियमितताओं के कारण जांच के घेरे में है
। अपने कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा किए गए
भ्रष्टाचार की जांच भी लोकायुक्त द्वारा की जा रही है।
उठ रहे सवाल एक ही उमीदवार का
साक्षात्कार यों.
इनके द्वारा पद को बेचे जाने की नियत के आगे नियमों
को भी दरकिनार कर दिया गया है । नियमानुसार
साक्षात्कार के लिए कम से कम तीन व्यक्तियों का होना
आवश्यक हैए लेकिन यहां चेयरमैन वाय पी साहनी ने
नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उमीदवार सुनील जैन
से पद का सौदा कर आज साक्षात्कार ले लिया।
आचार संहिता को लेकर हड़बड़ी.
विश्वविद्यालय के भ्रष्ट प्रशासन द्वारा एक ही व्यक्ति का
साक्षात्कार लेने के पीछे उद्देश्य आचार संहिता के पूर्व
ही नियुक्ति कर देने का है। भ्रष्टाचार की कमाई करने
की हड़बड़ी और आचार संहिता लगने का भय इनमे
इतना व्याप्त था कि आनन.फानन में एक ही उमीदवार
का साक्षात्कार ले लिया गया ।
पूर्व में लगे हैं कई आरोप.
इससे पूर्व विश्वविद्यालय अपनी विसंगतियों को लेकर
सुर्खियों में रहा है कुलपति द्वारा जहां मनमाने तरीके से
विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार किया गया तो वही कुलपति
डॉ जुयाल के खिलाफ एक महिला द्वारा भी नौकरी
दिलाने के नाम पर यौन शोषण करने का आरोप लगाया
गया है जिसकी जांच की जा रही है।
यों ना लगाई जाए धारा 52.
विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार
को देखते हुए अब सरकार से धारा 52 की मांग भी
पुरजोर तरीके से उठने लगी है। धारा 52 सरकार द्वारा
किसी संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते लगाई जाती
हैए जो पूर्व में विक्रम विश्वविद्यालय में भी लगाई जा
चुकी है।
यों चुप हैं जनप्रतिनिधि.
पूर्व साा में मलाई खाने वाले अधिकारी आज भी
वेटरनरी प्रशासन के अहम पदों पर काबिज हैं।
हालांकि अब साा परिवर्तन हो चुका है। लेकिन
समाचार पत्रों के माध्यम से वेटरनरी में व्याप्त भ्रष्टाचार
और यौन शोषण की खबर आने के बाद भी शहर के
कई विधायकए जिनकी साा में भागीदारी है एके मौन
रहने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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